
आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास (Img: Google)
New Delhi: आम आदमी पार्टी की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने की खबर सामने आई। इस फैसले ने न सिर्फ पार्टी के भीतर बल्कि पूरे राजनीतिक माहौल में चर्चा छेड़ दी है। राघव चड्ढा को पार्टी के युवा और मजबूत चेहरों में गिना जाता था, ऐसे में उनका जाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
इन सब के बीच सबसे ज्यादा चर्चा आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया को लेकर हो रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पुरानी वीर रस की कविता को दोबारा साझा किया। उनकी कविता की पंक्तियां, “विदुर का भीष्म का पद अश्रु-प्रक्षालन नहीं भूला, कठिन-व्रत द्रोण-इंगित तपस्पथ-चालन नहीं भूला, कुटिल लाक्षागृहों के फेर में तूणीर टाँगा हैं, मगर शर का प्रखर हत लक्ष्य संचालन नहीं भूला..!” एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई हैं।
“विदुर का भीष्म का पद अश्रु-प्रक्षालन नहीं भूला,
कठिन-व्रत द्रोण-इंगित तपस्पथ-चालन नहीं भूला,
कुटिल लाक्षागृहों के फेर में तूणीर टाँगा हैं,
मगर शर का प्रखर हत लक्ष्य संचालन नहीं भूला..!” pic.twitter.com/dDowLu6eoi— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) April 4, 2026
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कुमार विश्वास की इस कविता में महाभारत के पात्रों, भीष्म, द्रोण और विदुर का जिक्र है। यह कविता निष्ठा, धर्म और संघर्ष की बात करती है। राजनीतिक जानकार इसे मौजूदा हालात से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि यह कविता सिर्फ साहित्य नहीं, बल्कि एक संकेत भी हो सकती है।
राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं माना जा रहा। इसे आम आदमी पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और असंतोष से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पार्टी को एकजुटता की जरूरत है, इस तरह के घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुमार विश्वास पहले भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं। कुमार विश्वास की ताजा पोस्ट को भी उसी कड़ी में देखा जा रहा है जहां वह बिना नाम लिए अपनी बात कहने की कोशिश करते हैं।
Location : New Delhi
Published : 25 April 2026, 9:42 AM IST