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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम पिछले वर्ष 24 अक्टूबर को जिले में मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान चला रही थी। इसी दौरान अधिकारियों को सूचना मिली कि अमरोहा से एक वाहन में करीब 1500 किलोग्राम पनीर भरकर दिल्ली में सप्लाई के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही विभागीय टीम ने हाईवे-09 स्थित छिजारसी टोल प्लाजा के पास कार्रवाई की। टीम ने वाहन में रखे पनीर का नमूना लिया और उसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। इसके बाद प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई की गई।
पिछले वर्ष 24 दिसंबर को आई जांच रिपोर्ट में पनीर की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, पनीर में वसा की मात्रा तय अधिकतम सीमा 44 से अधिक मिली। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने नमूने को खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियमों के तहत निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं माना। विभाग के अनुसार, पनीर तैयार करने में स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP) के साथ रिफाइंड और वनस्पति घी का इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में सामने आई गड़बड़ी के आधार पर डेयरी संचालक के खिलाफ कार्रवाई की गई।
मामले में कार्रवाई केवल पनीर की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रही। खाद्य कारोबार के लिए जरूरी लाइसेंस नहीं होने पर भी डेयरी संचालक पर अर्थदंड लगाया गया। एडीएम संदीप कुमार की कोर्ट ने दोनों मामलों में कुल 1.25 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया है। इसमें बिना लाइसेंस खाद्य कारोबार करने पर 25 हजार रुपये और पनीर का नमूना मानकों के अनुरूप नहीं मिलने पर एक लाख रुपये का जुर्माना शामिल है।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और कारोबार से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विभाग की ओर से मिलावटखोरी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। छिजारसी टोल प्लाजा पर पकड़े गए पनीर के मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है। विभागीय कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों को यह संदेश भी जाता है कि बिना जरूरी लाइसेंस कारोबार करने और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।
Location : New Delhi
Published : 21 October 2026, 12:03 PM IST