दूषित पानी से हुई मौतों के बाद इंदौर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। 2014 बैच के आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। पूर्व आयुक्त दिलीप यादव को लापरवाही के चलते हटाया गया। मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

आईएएस अधिकारी क्षीतिज सिंघल (Img: Google)
Indore: इंदौर नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए 2014 बैच के आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को नया आयुक्त नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति शुक्रवार रात पूर्व आयुक्त दिलीप कुमार यादव के तबादले के तुरंत बाद की गई। बताया जा रहा है कि क्षितिज सिंघल शनिवार को ही अपना कार्यभार संभाल लेंगे। दूषित पानी से हुई मौतों के मामले ने प्रदेश सरकार को कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है।
क्षितिज सिंघल को प्रशासनिक हलकों में एक सख्त, ईमानदार और बेबाक अधिकारी के रूप में जाना जाता है। वे इससे पहले उज्जैन नगर निगम और बिजली वितरण कंपनी में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी निर्णय लेने की क्षमता और कार्यशैली के चलते उन्हें चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं। हालांकि, उनकी स्पष्टवादिता कई बार राजनीतिक नेतृत्व से टकराव का कारण भी बनी है।
क्षितिज सिंघल की पत्नी शीतला पटले भी आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में सिवनी जिले की कलेक्टर हैं। कुछ वर्ष पहले दोनों ने 1 जनवरी को बिना किसी मुहूर्त के कोर्ट मैरिज की थी, जो प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बनी थी।
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पूर्व आयुक्त दिलीप कुमार यादव का कार्यकाल इंदौर नगर निगम के इतिहास में सबसे छोटा रहा। 9 सितंबर को पदस्थ हुए यादव केवल चार महीने ही इस पद पर रह सके। दूषित पानी से 10 से अधिक लोगों की मौत के बाद सरकार ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए उन्हें हटा दिया। साथ ही, एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर इंदौर से स्थानांतरित किया गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि नागरिकों का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही, प्रदेश के सभी नगर निगमों में स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने के आदेश दिए गए हैं।
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2025 के अंतिम दिनों में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से अब तक 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक पांच महीने का मासूम भी शामिल है। 200 से ज्यादा लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाजरत हैं। इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और जल आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।