
तुलसी
New Delhi: भारतीय संस्कृति में तुलसी को देवी तुलसी के रूप में पूजा जाता है। इसे "वृंदा" भी कहा जाता है और इसे भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि भगवान विष्णु को तुलसी के बिना भोग अर्पण करना अधूरा होता है। तुलसी का एक पत्ता भी ईश्वर की कृपा पाने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
धार्मिक महत्व
जब भगवान विष्णु को जल अर्पण या भोग लगाया जाता है, तो उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखा जाता है। मान्यता है कि तुलसी युक्त भोग भगवान तुरंत स्वीकार करते हैं। यही नहीं, तुलसी को घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
आयुर्वेद में तुलसी का महत्व
आयुर्वेद में तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर बताया गया है। यह न केवल रोगों से लड़ने में सहायक है बल्कि प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करती है। सुबह खाली पेट तुलसी की 4 पत्तियों का सेवन करने से मधुमेह, रक्त विकार, पाचन तंत्र की गड़बड़ी, सर्दी-खांसी, कैंसर जैसी बीमारियों से राहत मिलती है।
तुलसी का अर्क पानी में मिलाकर पीने से शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है और एलर्जी जनित सर्दी-खांसी में भी लाभ मिलता है।
तांबे के जल में तुलसी का पत्ता
तांबे के पात्र में पानी भरकर उसमें तुलसी का पत्ता डालना न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है, बल्कि इससे पानी भी शुद्ध होता है। तांबा और तुलसी दोनों ही प्राकृतिक कीटाणुनाशक हैं और दूषित पानी को पीने योग्य बना सकते हैं।
तनाव और श्वसन संबंधी रोगों में राहत
तुलसी के पास बैठना, उसकी सुगंध लेना और तुलसी युक्त जल का सेवन करना मानसिक तनाव को कम करता है। श्वास रोग, अस्थमा और अन्य फेफड़ों की समस्याओं में भी तुलसी का सेवन लाभकारी माना गया है।
वास्तु दोष और संकट का संकेत
वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा यदि घर के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) से वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम) के बीच में लगाया जाए तो वास्तु दोष दूर होते हैं। यदि जमीन उपलब्ध नहीं है, तो तुलसी को गमले में भी लगाया जा सकता है।
ऐसी मान्यता भी है कि घर में यदि कोई बड़ा संकट आने वाला होता है, तो तुलसी का पौधा अपने आप सूखने लगता है, भले ही आप उसकी कितनी भी देखभाल करें।
Location : New Delhi
Published : 5 August 2025, 2:40 PM IST