उलट गई शादी की परंपरा! यहां दुल्हन नहीं, दूल्हा होता है विदा… जानिए इस अनोखी जनजाति का पूरा सच

सहारा रेगिस्तान की तुआरेग जनजाति की अनोखी प्रथाएं! जहाँ शादी के बाद दूल्हा विदा होकर ससुराल जाता है, जवान होते ही पुरुषों को चेहरा ढकना पड़ता है और परिवार की हर संपत्ति पर केवल महिलाओं का हक होता है। जानिए इस अनोखे समाज की पूरी कहानी

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 August 2026, 3:53 PM IST

New Delhi: हम सबने बचपन से यही देखा और सुना है कि शादी के बाद दुल्हन अपना घर छोड़कर ससुराल जाती है और समाज में महिलाओं को चेहरा ढकने की हिदायत दी जाती है। लेकिन अगर आप सहारा के तपते रेगिस्तान में कदम रखेंगे, तो यहाँ आपको सामाजिक नियमों की पूरी तस्वीर बिल्कुल उलट दिखाई देगी। अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में रहने वाली तुआरेग जनजाति में सदियों से ऐसी परंपराएं चली आ रही हैं, जो आधुनिक दुनिया के लोगों को सोच में डाल देती हैं।

जवान होते ही पुरुषों को ढकना पड़ता है अपना चेहरा

तुआरेग समाज की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां महिलाएं नहीं, बल्कि पुरुष पर्दा करते हैं। जब इस जनजाति के लड़के किशोरावस्था (जवानी) की दहलीज़ पर कदम रखते हैं, तो उन्हें नीले रंग के लंबे सूती कपड़े (टैगेलमस्ट) से अपना पूरा चेहरा ढकना अनिवार्य कर दिया जाता है।

इस समाज में पुरुषों का चेहरा ढकना सम्मान, शालीनता और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। हैरानी की बात यह है कि परिवार की महिलाओं और अपनी पत्नी के सामने भी पुरुष बिना चेहरा ढके नहीं आ सकते, जबकि महिलाओं को चेहरा ढंकने की कोई बंदिश नहीं है।

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शादी के बाद ससुराल विदा होता है दूल्हा

तुआरेग समाज में शादी की रस्में भी आम दुनिया से बिल्कुल जुदा हैं। यहाँ शादी के बाद दुल्हन नहीं, बल्कि दूल्हा अपना घर-बार छोड़कर अपनी पत्नी के घर यानी अपने ससुराल रहने चला जाता है। जीवनसाथी चुनने से लेकर परिवार से जुड़े हर बड़े फैसले में महिलाओं की मर्जी ही सर्वोपरि होती है।

यदि किसी कारणवश शादी टूटती है या तलाक होता है, तो घर का सारा सामान और मवेशी महिला के पास ही रहते हैं, जबकि पुरुष को खाली हाथ अपने पुराने घर लौटना पड़ता है।

मातृसत्तात्मक समाज: संपत्ति और नाम सब महिलाओं का

यह समाज पूरी तरह से मातृवंशीय (मातृसत्तात्मक) है। इसका मतलब यह है कि परिवार की पहचान, वंश और संपत्ति मां के नाम से ही आगे बढ़ती है। घर, जमीन और ऊंट-मवेशी जैसी तमाम कीमती संपत्तियों की असली मालिक परिवार की महिलाएं ही होती हैं। इस जनजाति को अक्सर 'ब्लू पीपल ऑफ द सहारा' (सहारा के नीले लोग) भी कहा जाता है, क्योंकि इनके पारंपरिक कपड़ों का नीला रंग इनकी खास पहचान है।

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सोशल मीडिया पर क्यों बनी चर्चा का विषय?

हाल ही में एक पॉपुलर यूट्यूब चैनल फोटो विस्पर यूके (Photo Whisper UK) पर इस जनजाति की जीवनशैली और इनकी अनोखी रीति-रिवाजों से जुड़ा एक विस्तृत वीडियो शेयर किया गया है।

इसके सामने आने के बाद से ही दुनिया भर के लोग इस अजीबोगरीब समाज की जमकर चर्चा कर रहे हैं। इतिहासकारों का मानना है कि तुआरेग जनजाति की यह सोच साबित करती है कि दुनिया में रिश्तों को निभाने और समाज को चलाने के कई और भी खूबसूरत और अलग रास्ते हो सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  7 August 2026, 3:53 PM IST