
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: आज के समय में रिश्तों में तनाव की एक बड़ी वजह टॉक्सिक इन-लॉज भी बनते जा रहे हैं। कई बार ससुराल वालों का व्यवहार व्यक्ति की मानसिक शांति और शादीशुदा जिंदगी दोनों पर असर डालता है। हालांकि हर समस्या का समाधान लड़ाई या रिश्ते खत्म करना नहीं होता। सही समझ, सीमाएं तय करना और शांत तरीके अपनाकर ऐसे रिश्तों को संभाला जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार टॉक्सिक व्यवहार अचानक पैदा नहीं होता। इसके पीछे कई भावनात्मक और मानसिक कारण हो सकते हैं। कुछ लोग हर चीज अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं, जबकि कुछ अपनी भावनाओं को सही तरीके से संभाल नहीं पाते। कई बार पुराने अनुभव या दुख भी उनके व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
ऐसे में अक्सर देखने को मिलता है कि इन-लॉज आपके पेरेंटिंग के नियमों की इज्जत नहीं करते, आपकी पर्सनल स्पेस को गलत समझते हैं या परिवार के लोगों के बीच गलतफहमियां पैदा करने की कोशिश करते हैं। इन पैटर्न्स को पहचानना मानसिक शांति बनाए रखने का पहला कदम माना जाता है।
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रिश्तों के जानकार मानते हैं कि इन-लॉज से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे शादीशुदा रिश्ते को भी प्रभावित करने लगती हैं। अगर पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ खड़े नहीं होते, तो किसी भी तरह की सीमा तय करना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे मामलों में जरूरी है कि दोनों पार्टनर मिलकर समस्या का सामना करें। खासतौर पर जिस पार्टनर के माता-पिता हों, उसी को अपने परिवार से शांत और साफ तरीके से बात करनी चाहिए। अगर दूसरा साथी सीधे नियम समझाने लगे, तो कई बार विवाद और बढ़ सकता है। जब कपल एक टीम की तरह व्यवहार करता है, तो न सिर्फ सीमाएं आसानी से लागू होती हैं बल्कि रिश्ता भी मजबूत बनता है।
टॉक्सिक व्यवहार से बचने के लिए सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं होता, बल्कि उनका पालन करना भी जरूरी होता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर बात को बार-बार समझाने या बहस करने की बजाय साफ और विनम्र भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर अगर कोई आपकी निजी जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दखल दे रहा है, तो शांति से अपनी बात रखना ज्यादा असरदार हो सकता है। इससे सामने वाले को भी संदेश स्पष्ट मिलता है और विवाद की संभावना कम रहती है।
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कई बार कुछ लोग जानबूझकर बहस या भावनात्मक प्रतिक्रिया चाहते हैं। ऐसी स्थिति में 'ग्रे रॉक' तरीका काफी मददगार माना जाता है। इसका मतलब है कि आप सामने वाले की बातों पर ज्यादा भावनात्मक प्रतिक्रिया न दें और बातचीत को छोटा और सामान्य रखें।
जैसे केवल 'ठीक है', 'समझ गया' या 'हां' जैसे छोटे जवाब देना। इससे सामने वाले को विवाद बढ़ाने का मौका कम मिलता है और आपका मानसिक तनाव भी घटता है।
अगर इन-लॉज का व्यवहार लगातार मानसिक रूप से नुकसान पहुंचा रहा हो, तो उनसे कुछ दूरी बनाना भी जरूरी हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि रिश्ता खत्म किया जा रहा है, बल्कि यह अपनी मानसिक शांति और रिश्ते की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आप हर किसी की प्रतिक्रिया को कंट्रोल नहीं कर सकते। अगर सामने वाला गुस्सा करे, ड्रामा करे या चुप्पी साध ले, तो उसे अपनी गलती मानकर खुद को परेशान करना सही नहीं है। ऐसे समय में अपने पार्टनर का साथ लेना और खुद की मानसिक शांति को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी होता है।
Location : New Delhi
Published : 20 May 2026, 10:13 AM IST