Karwa Chauth 2026: चांद नहीं दिखा तो क्या हुआ, बादलों की लुका-छुपी के बीच दिल से ऐसे मनाएं प्यार का करवा चौथ

आज पूरे देश में ज्यादातर महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा है। मौसम की स्थितियों से झमाझम बारिश और बादलों का छाना होने के कारण चांद दिखाई न देने की आशंका है। ऐसे में महिलाओं के मन में यह सवाल आ सकता है कि अगर चांद न दिखे, तो व्रत कैसे खोला जाए? आइए ऐसे तरीकों के बारे में…

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 29 October 2026, 3:54 PM IST

New Delhi: शादी के बाद पहली करवा चौथ... हाथों में मेहंदी, सजी हुई चूड़ियां, खूबसूरत जोड़ा और पूरे दिन पति की लंबी उम्र के लिए रखा गया निर्जला व्रत। बस इंतजार है तो उस एक पल का जब आसमान में चांद निकलेगा, छलनी से उसका दीदार होगा और फिर पति का चेहरा देखकर व्रत खोला जाएगा। लेकिन इस बार दिल्ली-NCR में सुबह से ही मौसम के बदले मिजाज ने इस इंतजार को लेकर थोड़ी चिंता बढ़ा दी है। जरा सोचिए अगर इस खास शाम को आसमान में बादल छा जाएं और चांद दिखाई ही न दे तो क्या होगा? खासकर उन नई-नवेली दुल्हन के लिए यह पल निराश करने वाला हो सकता है, जिनकी पहली करवा चौथ को लेकर कई उम्मीदें और भावनाएं जुड़ी होती हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर बादलों की वजह से चांद दिखाई न दे तो पूजा कैसे करें और व्रत खोलने के लिए क्या विकल्प अपनाए जा सकते हैं?

न्यूमेरोवाणी के चीफ एस्ट्रो स्ट्रैटेजी ऑफिसर सिद्धार्थ एस कुमार के अनुसार, ऐसी स्थिति में भगवान शिव की पूजा या चंद्रमा के प्रतीक के जरिए धार्मिक रस्में निभाने पर विचार किया जा सकता है। आइए जानते हैं वे तीन तरीके, जिनके बारे में आपको जानकारी होनी चाहिए।

1. चांद नहीं दिखा तो भगवान शिव के सामने जोड़ लें हाथ

अगर आसमान में बादल हैं और चांद दिखाई नहीं दे रहा है, तो बार-बार छत पर जाकर उसे खोजने के बजाय आप घर पर ही पूजा की रस्में पूरी कर सकती हैं। भगवान शिव को 'चंद्रशेखर' कहा जाता है । धार्मिक परंपरा के अनुसार, जब चांद अपने तय समय पर निकल आए तो महिलाएं भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर प्रार्थना कर सकती हैं।

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इस दौरान आप अपने परिवार में चली आ रही विशेष परंपराओं और मंत्रों का पालन कर सकती हैं। अगर मौसम ठीक है और बाहर जाने में कोई रुकावट नहीं है, तो आप पास के किसी मंदिर में भी जा सकती हैं। हालाँकि, इसे हर परिवार पर लागू होने वाला कोई पक्का नियम नहीं माना जाना चाहिए।

2. चावल से बनाएं चांद, फिर छलनी से करें दर्शन

अगर बादलों की वजह से चांद दिखाई नहीं दे रहा है, तो कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार चावल से चंद्रमा की एक प्रतीकात्मक आकृति बनाई जा सकती है। इसके लिए एक साफ लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर कच्चे चावल के दानों से अर्धचंद्र का आकार बनाएं।

चांद निकलने के तय समय के बाद कुछ परिवारों में लोग इस प्रतीकात्मक चांद को 'करवा चौथ' की छलनी से देखते हैं और चंद्रमा से जुड़े पारंपरिक मंत्रों का जाप करते हैं। इसके बाद परिवार की परंपराओं के अनुसार बाकी रस्में पूरी की जा सकती हैं। ध्यान रखें कि यह प्रथा हर जगह या हर परिवार में नहीं अपनाई जाती है, इसलिए अपने परिवार की परंपराओं के अनुसार ही फैसला लेना सबसे अच्छा रहेगा।

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3. चांदी के सिक्के को मानें चंद्रमा का प्रतीक

चांदी का नाम आते ही चंद्रमा की चमक याद आ जाती है। धार्मिक परंपराओं में चांदी को 'चंद्र देव' से भी जोड़ा जाता है। इसलिए एक थाली में चांदी का साफ सिक्का या चांदी की कोई भी गोल चीज रखकर प्रतीकात्मक रूप से चंद्र देव का सम्मान किया जा सकता है। अगर चांद बादलों के पीछे छिपा है, तो यह तरीका उन महिलाओं के लिए मददगार हो सकता है जो अपने परिवार की मान्यताओं के अनुसार प्रतीकात्मक पूजा करना चाहती हैं। हालांकि, ऐसा करने से पहले परिवार के बड़ों या किसी जानकार व्यक्ति से सलाह जरूर ले लें।

Location :  New Delhi

Published :  29 October 2026, 3:54 PM IST