आज 29 जनवरी को है जया एकादशी का व्रत। कथा पाठ से मिलती है भगवान विष्णु की कृपा और पिशाच योनि से मुक्ति। जानिए जया एकादशी की पूरी कथा और धार्मिक महत्व।

जया एकादशी का व्रत (img source: google)
New Delhi: आज गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को श्रद्धा और भक्ति के साथ जया एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं, रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार एकादशी व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक उससे जुड़ी व्रत कथा का पाठ या श्रवण न किया जाए। इसलिए आज पूजा के दौरान जया एकादशी की कथा अवश्य पढ़नी या सुननी चाहिए।
जया एकादशी की कथा का संबंध देवराज इंद्र, गंधर्व और अप्सराओं से है। पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार देवराज इंद्र की सभा में अप्सराएं नृत्य कर रही थीं। उस सभा में गंधर्व पुष्पवंत, उसकी पुत्री पुष्पवती, गंधर्व चित्रसेन की पत्नी मालिनी और उसका पुत्र माल्यवान भी उपस्थित थे।
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नृत्य के दौरान पुष्पवती, माल्यवान को देखकर मोहित हो गई और दोनों के मन में काम भावना जाग उठी। वे अपने कर्तव्य से विमुख होकर कामासक्ति में लीन हो गए। देवराज इंद्र ने जब यह देखा तो उन्होंने दोनों को नृत्य करने का आदेश दिया, लेकिन मन विचलित होने के कारण वे ठीक से नृत्य नहीं कर पाए। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने पुष्पवती और माल्यवान को पिशाच योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया। श्राप के कारण दोनों को मृत्यु लोक में भटकना पड़ा और वे लंबे समय तक कष्ट झेलते रहे।
कई वर्षों बाद दोनों की भेंट एक महर्षि से हुई। उन्होंने अपनी पीड़ा बताते हुए मुक्ति का उपाय पूछा। तब ऋषि ने उन्हें माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने की सलाह दी। गंधर्व और पुष्पवती ने श्रद्धा के साथ जया एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उन्हें पिशाच योनि से मुक्ति मिली और वे पुनः दिव्य लोक को प्राप्त हुए।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार-
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