
प्रतीकात्मक छवि (सोर्स-Pinterest)
New Delhi: हर साल मानसून का आगमन अपने साथ सुहावना मौसम ही नहीं, बल्कि डेंगू का डर भी लेकर आता है। लेकिन अब इस खौफ को अलविदा कहने का समय आ चुका है। भारतीय स्वास्थ्य और चिकित्सा जगत के लिए एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देश की पहली डेंगू वैक्सीन 'क्यूडेंगा' (Qdenga) के उपयोग को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। यह कदम देश में डेंगू के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए बेहद कारगर साबित होने वाला है।
इस आधुनिक वैक्सीन (TAK-003) को मूल रूप से जापान की प्रसिद्ध दवा निर्माता कंपनी 'टाकेडा' (Takeda) ने विकसित किया है। हालांकि, भारतीय नागरिकों तक इसकी पहुंच को आसान और सुलभ बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत टाकेडा ने हैदराबाद स्थित 'बायोलॉजिकल ई' फार्मा कंपनी के साथ हाथ मिलाया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि इस टीके का बड़े पैमाने पर निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिससे देश में इसकी निर्बाध आपूर्ति बनी रहेगी।
डेंगू वायरस मुख्य रूप से चार अलग-अलग स्ट्रेन में फैला होता है। क्यूडेंगा एक 'टेट्रावेलेंट' वैक्सीन है, जो डेंगू के इन चारों रूपों के खिलाफ शरीर में मजबूत ढाल तैयार करती है।
इस टीके की सबसे बड़ी खासियत इसका सार्वभौमिक रूप से सुरक्षित होना है। पूर्व में आई कुछ वैक्सीन्स केवल उन्हीं लोगों को दी जा सकती थीं, जो पहले कभी डेंगू से संक्रमित हो चुके हों। इसके विपरीत, क्यूडेंगा ऐसे लोगों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावकारी है जिन्हें पहले कभी डेंगू नहीं हुआ है। क्लिनिकल ट्रायल्स के आंकड़ों के अनुसार, इस वैक्सीन को लगवाने वाले 90% से अधिक लोगों में मजबूत एंटीबॉडीज विकसित हुईं। यह न केवल संक्रमण के खतरे को कम करती है, बल्कि मरीज की हालत गंभीर होने और अस्पताल में भर्ती होने की संभावना को भी काफी हद तक समाप्त कर देती है।
पात्रता और उम्र: CDSCO की गाइडलाइंस के अनुसार, 4 वर्ष के बच्चों से लेकर 60 वर्ष तक के वयस्क इस वैक्सीन को लगवा सकते हैं।
खुराक का नियम: यह दो डोज वाली वैक्सीन है। पहला टीका लगने के ठीक 3 महीने बाद इसका दूसरा टीका लगाया जाएगा। इसे बांह में त्वचा के ठीक नीचे (सबकटेनियस इंजेक्शन) दिया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रमाणित और दुनिया के 40 से अधिक देशों में इस्तेमाल की जा रही यह वैक्सीन सुरक्षा के मानकों पर खरी उतरी है। सामान्य टीकों की तरह इसके प्रभाव भी बहुत हल्के हैं। टीका लगने के बाद हल्का बुखार, सिरदर्द या इंजेक्शन वाली जगह पर मामूली दर्द और सूजन महसूस हो सकती है। इसके गंभीर साइड इफेक्ट्स के मामले बेहद दुर्लभ हैं।
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हालिया मंजूरी के बाद, इसके बाजार मूल्य की आधिकारिक घोषणा होनी बाकी है। हालांकि, देश के भीतर ही उत्पादन होने के कारण इसके काफी किफायती होने की संभावना है। बाजार में उतरने के बाद सुरक्षा के एहतियाती नियम के तहत शुरुआती 6 महीनों तक इसके असर की व्यापक निगरानी की जाएगी।
विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि यह वैक्सीन डेंगू से मुकाबला करने के लिए एक मजबूत अतिरिक्त सुरक्षा कवच है, लेकिन यह व्यक्तिगत सावधानी का विकल्प नहीं है। वैक्सीन लगवाने के बाद भी मच्छरदानी का उपयोग करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और अपने घर या आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छर नियंत्रण के बुनियादी उपाय पहले की तरह ही जरूरी बने रहेंगे।
Location : New Delhi
Published : 20 July 2026, 4:32 PM IST