जब पुरुषों को पहननी पड़ती थी महिलाओं की पोशाक, तब जानिए कैसे पलटी बिहार के ऑर्केस्ट्रा की दिलचस्प कहानी

बिहार की शादियों और आयोजनों की शान कहे जाने वाला ऑर्केस्ट्रा आज मनोरंजन का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है, लेकिन इसकी जड़ें पारंपरिक 'लौंडा नाच' और भिखारी ठाकुर के लोक थिएटर से जुड़ी हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 9 September 2026, 6:30 PM IST

Patna: बिहार में शायद ही कोई ऐसी शादी होती हो जिसमें रात के समय तेज़ संगीत पर नाच-गाना न हो। शादियों, मुंडन समारोहों और दूसरे बड़े आयोजनों में ऑर्केस्ट्रा मनोरंजन का मुख्य ज़रिया बन गया है। गांवों में भीड़ के बीच भोजपुरी धुनों पर कलाकारों को नाचते हुए देखना आम बात है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज का ऑर्केस्ट्रा हमेशा से ऐसा नहीं था?

लौंडा नाच से जुड़ी हैं इसकी जड़ें

बिहार में ऑर्केस्ट्रा डांस की कहानी पारंपरिक 'लौंडा नाच' से जुड़ी है। भोजपुरी के मशहूर लोक कलाकार और नाटककार भिखारी ठाकुर ने इस लोक शैली का इस्तेमाल सामाजिक मुद्दों को लोगों तक पहुंचाने के लिए किया था। उस दौर में पुरुष कलाकार नाटक करने और नाचने के लिए महिलाओं के कपड़े पहनते थे। इन प्रस्तुतियों में लोक गीत और पारंपरिक वाद्य यंत्र शामिल होते थे, जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संदेश भी देते थे।

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जब लोकगीतों की जगह फिल्मी गानों ने ली

जैसे-जैसे समय बदला, मनोरंजन का स्वरूप भी बदल गया। धीरे-धीरे डांस परफॉर्मेंस में महिलाओं को शामिल किया जाने लगा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की जगह इलेक्ट्रिक साउंड सिस्टम ने ले ली। फिल्मी गानों और एल्बमों की लोकप्रियता खासकर 1980 के दशक में के कारण पारंपरिक लोक गीतों की जगह भोजपुरी और बॉलीवुड गानों ने ले ली। इस बदलाव ने धीरे-धीरे पारंपरिक लोक थिएटर को आधुनिक कमर्शियल ऑर्केस्ट्रा में बदल दिया।

शादी में ऑर्केस्ट्रा बना 'स्टेटस सिंबल'

जिन गांवों में मनोरंजन के साधन सीमित थे, वहां ऑर्केस्ट्रा खास मौकों पर लोगों को एक साथ लाने का जरिया बन गया। शादियों, मुंडन समारोहों और दूसरे शुभ आयोजनों के दौरान लोग घंटों तक इन प्रस्तुतियों को देखने के लिए उमड़ पड़ते थे। समय के साथ ऑर्केस्ट्रा सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह गया; कई जगहों पर इसे परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रतीक के तौर पर देखा जाने लगा।

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मनोरंजन से विवादों तक पहुंचा सफर

शुरुआत में लोक नृत्य सामाजिक बुराइयों को उजागर करने का माध्यम था। लोक गीतों और नाटकों के ज़रिए पलायन, दहेज प्रथा और नशीली दवाओं के सेवन जैसे मुद्दों को उठाया जाता था। हालांकि, आधुनिक समय में इन प्रस्तुतियों का स्वरूप काफी बदल गया है। अलग-अलग आयोजनों में अश्लील गानों और प्रस्तुतियों को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं। ऑर्केस्ट्रा से जुड़ी महिला कलाकारों के साथ दुर्व्यवहार, शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं।

Location :  Patna

Published :  9 September 2026, 6:30 PM IST