उत्तराखंड में PG Doctors के लिए 2 साल की सरकारी सेवा अनिवार्य, मेडिकल एडमिशन के बदले नियम

उत्तराखंड में पीजी डॉक्टरों के लिए 2 साल का सरकारी सर्विस बॉन्ड अनिवार्य! 260 सीटों पर लागू होंगे नए नियम। जानिए 60 हजार फीस और अस्पतालों में 50% खाली पदों को भरने के लिए सरकार की पूरी रणनीति।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 September 2026, 3:10 PM IST

Dehradun: उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी किल्लत को दूर करने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा और नीतिगत फैसला लेने जा रही है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) करने वाले डॉक्टरों के लिए राज्य में कम से कम 2 साल तक सेवाएं देना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए छात्रों को पीजी में प्रवेश लेते समय ही 2 साल का अनिवार्य सर्विस बॉन्ड भरना होगा।

एडमिशन के समय ही साइन करना होगा सर्विस बॉन्ड

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रमों (MD/MS) में दाखिला लेने वाले हर एमबीबीएस डॉक्टर को एडमिशन के समय ही इस शर्त को स्वीकार करना होगा। पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद डॉक्टर राज्य से बाहर जाकर निजी प्रैक्टिस या नौकरी नहीं कर सकेंगे, बल्कि उन्हें पहले उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में अपनी सेवाएं देनी होंगी। इस दूरगामी व्यवस्था का सीधा मकसद राज्य की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था को विशेषज्ञ डॉक्टरों का सीधा सहारा देना है।

260 सीटों पर लागू होगी व्यवस्था, सालाना 60 हजार होगी फीस

उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की कुल 260 सीटें उपलब्ध हैं। शासन को भेजे गए नए ड्राफ्ट में इन सभी 260 सीटों को बॉन्ड व्यवस्था के तहत ही भरने की योजना बनाई गई है। एडमिशन के समय ही अभ्यर्थियों को सेवा शर्तों की पूरी जानकारी दी जाएगी।

UP Board Exam 2027 में बड़ा बदलाव, APAAR ID से जुड़ेंगे छात्रों के रिकॉर्ड, ऑनलाइन तय होंगे सेंटर

इसके अतिरिक्त, इस बॉन्ड व्यवस्था के तहत पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों से प्रति वर्ष 60 हजार रुपये की बेहद रियायती फीस लेने का भी प्रस्ताव रखा गया है, ताकि मेधावी डॉक्टरों को इसका सीधा लाभ मिल सके।

50 फीसदी खाली पदों को भरने की बड़ी कवायद

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ राजकीय मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। इस बड़ी कमी के कारण आम जनता को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता है।

उत्तराखंड में सरकारी नौकरी का शानदार मौका: UKSSSC ने निकाली ग्रुप-सी भर्ती, इस तारीख तक करें आवेदन

चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, इस नए नियम के लागू होने से हर साल करीब ढाई सौ से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टर सीधे तौर पर सरकारी सेवाओं से जुड़ेंगे, जिससे राज्य के दुर्गम इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।

Location :  Dehradun

Published :  18 September 2026, 3:10 PM IST