Teachers Day Special: प्रतापगढ़ के इन दो शिक्षकों ने बदल दी तस्वीर, ग्रामीण बच्चों के सपनों को मिल रही नई उड़ान

प्रतापगढ़ में दो शिक्षकों की मेहनत ने सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने की कहानी लिखी है। मोहम्मद फरहीम ने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अपनी जमा-पूंजी तक खर्च कर दी, जबकि शिक्षिका साधना मिश्रा ने सीमित संसाधनों में पढ़ाई को इतना रोचक बनाया कि बच्चों की प्रतिभा निखरने लगी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 September 2026, 2:19 PM IST

Pratapgarh: "गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरू आपने गोविन्द दियो बताय।।" कबीरदास जी की ये पंक्तियां प्रतापगढ़ के एक ऐसे शिक्षक पर शत-प्रतिशत सटीक बैठती हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जमा-पूंजी और जीवन ग्रामीण बच्चों के भविष्य को संवारने में झोंक दिया है। शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर हम बात कर रहे हैं प्रतापगढ़ जनपद के मानधाता विकास खंड अंतर्गत खरवई गांव के मूल निवासी और शिक्षक मोहम्मद फरहीम की, जिन्हें उनकी उत्कृष्ट और अनुकरणीय सेवाओं के लिए पिछले वर्ष राष्ट्रीय पुरस्कार, पूर्व में राज्य अध्यापक पुरस्कार सहित विभिन्न उच्च सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

वह कटरा गुलाब सिंह के उच्च प्राथमिक विद्यालय (मॉडल स्कूल) में कार्यरत रहकर बच्चों के जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं।

कॉन्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहा है फरहीम का 'मॉडल स्कूल'

मोहम्मद फरहीम ने अपनी कड़ी मेहनत और अनोखे विजन से सरकारी स्कूल की पूरी तस्वीर ही बदलकर रख दी है। उनके प्रयासों के बदौलत यह विद्यालय ब्लॉक का पहला ऐसा मॉडल सरकारी स्कूल बन चुका है, जहां पूरी तरह अंग्रेजी माध्यम में शिक्षण की उत्कृष्ट सुविधा उपलब्ध है। उनकी इसी निष्ठा का परिणाम है कि आज क्षेत्र के 80 प्रतिशत से अधिक अभिभावक निजी स्कूलों को छोड़कर अपने बच्चों का दाखिला फरहीम के इस सरकारी स्कूल में करा रहे हैं।

जब बच्चों की पढ़ाई के लिए खर्च कर दी जमा-पूंजी

मो. फरहीम केवल किताबों से नहीं, बल्कि दिल से पढ़ाते हैं। वैश्विक महामारी लॉकडाउन के कठिन दौर में जब पूरे देश में स्कूल बंद थे, तब उन्होंने सबसे पहले ऑनलाइन पढ़ाई की शुरुआत कर पूरे प्रदेश में एक मिसाल कायम की थी। आज उनके स्कूल के बच्चे शिक्षा के साथ साथ खेलकूद में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। जिसकी चर्चा जिले से बाहर भी हो रही है।

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सीमित संसाधनों में ग्रामीण बच्चों के सपनों को 'साधना' दे रही नई उड़ान

"अक्षर-अक्षर हमें सिखाते, शब्द-शब्द का अर्थ बताते, कभी प्यार से कभी डांट से, जीवन जीना हमें सिखाते।" शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर आज हम आपको रूबरू करवा रहे हैं एक ऐसी ही समर्पित शिक्षिका और आदर्श शिक्षक मो. फरहीम से, जिन्होंने ग्रामीण परिवेश की तमाम दुश्वारियों और सीमित संसाधनों को कभी बच्चों की राह का रोड़ा नहीं बनने दिया।

शिक्षा के साथ बच्चों की निखार रही प्रतिभा

प्रतापगढ़ जनपद के गौरा विकास खंड अंतर्गत कंपोजिट विद्यालय धनुहां में कार्यरत विज्ञान वर्ग की शिक्षिका साधना मिश्रा, जो सरकारी स्कूल के बच्चों के भविष्य को संवारने में दिन-रात जुटी हुई हैं।

संसाधनों की कमी पर भारी पड़ा शिक्षिका का जज्बा

ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में अक्सर बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक संसाधनों की कमी देखने को मिलती है, लेकिन शिक्षिका साधना मिश्रा ने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया है। उन्होंने हार मानने के बजाय लीक से हटकर काम शुरू किया और उनकी मेहनत धीरे-धीरे रंग ला रही है। खेल-खेल में शिक्षा (लर्निंग बाय डूइंग), स्वरचित कविताओं और कबाड़ से जुगाड़ (TLM - टीचिंग लर्निंग मटेरियल) के जरिए उन्होंने कठिन से कठिन विषयों को भी बच्चों के लिए बेहद आसान और मनोरंजक बना दिया है।

बच्चों की उपस्थिति में हुआ सुधार

स्थानीय ग्रामीणों और सहकर्मियों के मुताबिक, शिक्षिका साधना के अनूठे और स्नेहमयी शिक्षण तौर-तरीकों का ही असर है कि विद्यालय के प्रति बच्चों का नजरिया पूरी तरह बदल गया है। जो बच्चे पहले स्कूल आने से कतराते थे, अब वे समय से पहले स्कूल पहुंचते हैं।

सीमित संसाधनों के बीच भी वह बच्चों को सामान्य ज्ञान, कला और नैतिक शिक्षा की ऐसी घुट्टी पिला रही हैं, जिससे धनुहां विद्यालय के बच्चे ब्लॉक, जिला और राज्य स्तरीय विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। बताते हैं कि पिछले चार-पांच साल से विद्यालय के छात्र छात्राओं में पढ़ाई के साथ साथ खेलकूद में भी रुचि बढ़ी है। यही वजह है कि इस वर्ष भी विद्यालय के आधा दर्जन से अधिक बच्चे स्पांयर अवार्ड योजना में जगह बनाने में कामयाब रहे।

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इसके अलावा चार बच्चों का चयन अटल आवासीय विद्यालय व दो बच्चों का पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में चयन हुआ है। वहीं राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता कुश्ती में साक्षी यादव और भावना जगह बनाने में कामयाब रही। हैंडबॉल में शालू शर्मा और श्रेया विश्वकर्मा ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में गोल्ड और कांस्य पदक जीता है।

ग्रामीणों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं शिक्षिका साधना

धनुहां के आसपास के इलाकों में साधना की कार्यशैली की हर कोई तारीफ कर रहा है। वह न केवल स्कूल में पढ़ाती हैं, बल्कि समय-समय पर अभिभावकों के साथ बैठक कर उन्हें बालिकाओं की शिक्षा और बच्चों के सुनहरे भविष्य के प्रति जागरूक भी करती हैं। शिक्षक दिवस के मौके पर समूचा क्षेत्र ऐसी कर्मठ शिक्षिका के जज्बे को सलाम कर रहा है, जो बिना किसी बड़ी सुख-सुविधा की चाह के, चुपचाप समाज की बुनियाद को मजबूत करने में लगी हुई हैं।

Location :  Pratapgarh

Published :  5 September 2026, 2:19 PM IST