
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- Pinterest)
New Delhi: फुटबॉल का सबसे बड़ा टूर्नामेंट फीफा वर्ल्ड कप 2026 दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। 11 जून 2026 से शुरू हुआ यह टूर्नामेंट 19 जुलाई 2026 तक चलेगा। ऐसे बड़े आयोजनों के दौरान दर्शकों का ध्यान केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि उन आवाजों पर भी जाता है जो मैच के हर पल को रोमांचक अंदाज में दर्शकों तक पहुंचाती हैं। स्टेडियम के अंदर होने वाली हर गतिविधि को शब्दों में बयां करने का काम स्पोर्ट्स कमेंटेटर या होस्ट करते हैं।
कई युवा खेलों के प्रति अपने जुनून को करियर में बदलना चाहते हैं और उनके मन में यह सवाल उठता है कि आखिर फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में कमेंट्री करने का मौका कैसे मिलता है और इसके लिए कौन-सी पढ़ाई करनी होती है।
स्पोर्ट्स कमेंटेटर या होस्ट बनने के लिए कोई अलग और विशेष डिग्री निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि, इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मास कम्युनिकेशन के अंतर्गत न्यूज मीडिया और जर्नलिज्म जैसे कई कोर्स शामिल होते हैं।
इनमें स्पोर्ट्स जर्नलिज्म एक ऐसा विशेष कोर्स है, जिसे खेल पत्रकारिता और कमेंट्री के क्षेत्र में उपयोगी माना जाता है। इस कोर्स में दाखिला लेने के लिए उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को मीडिया, रिपोर्टिंग, प्रस्तुतीकरण और खेलों से जुड़ी जानकारी दी जाती है, जो आगे चलकर उनके करियर में मददगार साबित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्पोर्ट्स जर्नलिज्म की डिग्री हासिल कर लेना ही सफलता की गारंटी नहीं है। एक सफल स्पोर्ट्स होस्ट या कमेंटेटर बनने के लिए कई जरूरी कौशल भी होने चाहिए।
सबसे पहले उम्मीदवार की हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ होना जरूरी है। मैच के दौरान जानकारी को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने के लिए भाषा का ज्ञान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसके अलावा जिस खेल में कमेंट्री करनी है, उसके नियमों और तकनीकी पहलुओं की पूरी जानकारी होना भी आवश्यक है। एक कमेंटेटर को खेल से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी पता होनी चाहिए ताकि वह दर्शकों को सटीक और रोचक जानकारी दे सके।
कमेंट्री केवल मैच में हो रही घटनाओं का वर्णन भर नहीं होती। दर्शक खिलाड़ियों के बारे में भी जानना चाहते हैं। ऐसे में कमेंटेटर को टीमों और खिलाड़ियों के बैकग्राउंड की भी अच्छी जानकारी होनी चाहिए।
मैच देखने वाले दर्शक टीवी, मोबाइल या लैपटॉप किसी भी माध्यम से जुड़े हों, उन्हें खेल के साथ-साथ खिलाड़ियों से जुड़ी रोचक जानकारियां भी मिलनी चाहिए। यही बात एक कमेंटेटर को दूसरों से अलग बनाती है।
इस क्षेत्र में सफलता के लिए आवाज और बोलने का तरीका भी अहम भूमिका निभाता है। कई लोगों के पास खेल की पूरी जानकारी होती है, लेकिन वे उसे प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाते। ऐसे में उनके लिए इस क्षेत्र में आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है।
एक अच्छे कमेंटेटर की आवाज में ऊर्जा, भावनाएं और एक्सप्रेशन होना चाहिए। मैच के रोमांच को दर्शकों तक पहुंचाने की क्षमता ही इस पेशे की सबसे बड़ी पहचान होती है।
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पढ़ाई पूरी करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती काम का अवसर हासिल करना होता है। आमतौर पर किसी भी व्यक्ति को शुरुआत में ही फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में कमेंट्री करने का मौका नहीं मिलता।
करियर की शुरुआत छोटे स्तर के मुकाबलों और आयोजनों से करनी पड़ती है। लगातार अनुभव हासिल करने के बाद ही स्पोर्ट्स चैनल और मीडिया कंपनियां बड़े टूर्नामेंट्स के लिए अवसर देती हैं। यही अनुभव आगे चलकर किसी भी स्पोर्ट्स होस्ट को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Location : New Delhi
Published : 25 June 2026, 10:44 AM IST