रिश्तों में बर्फ पिघल रही है? अमेरिका ने अचानक हटाए चार भारतीय कंपनियों से प्रतिबंध, इन्हें मिली राहत

अमेरिका ने रूस से जुड़े आरोपों में प्रतिबंधित चार भारतीय कंपनियों को अपनी प्रतिबंध सूची से बाहर कर दिया है। इस फैसले ने भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। क्या यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है या दोनों देशों के बीच तनाव कम होने का संकेत?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 1 July 2026, 4:01 PM IST

New Delhi: अमेरिका ने एक अहम फैसले में चार भारतीय कंपनियों को अपनी प्रतिबंध सूची से हटा दिया है। ये वही कंपनियां थीं, जिन पर रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को तकनीक और उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप लगे थे। अमेरिकी वित्त विभाग के इस कदम के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत और अमेरिका के रिश्तों में फिर से नरमी आ रही है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर मतभेद देखने को मिले हैं।

किन कंपनियों को मिली राहत?

अमेरिकी वित्त विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने जिन चार भारतीय कंपनियों को अपनी स्पेशली डिजिग्नेटेड नेशनल्स एंड ब्लॉक्ड पर्सन्स (SDN) सूची से हटाया है, उनमें हैदराबाद की आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, लोकेश मशीन्स लिमिटेड, अहमदाबाद की गैलेक्सी बेयरिंग्स और नई दिल्ली की शौर्य एरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों के नाम हटने के बाद अब उन पर पहले लागू अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध प्रभावी नहीं रहेंगे।

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क्यों लगाए गए थे प्रतिबंध?

अमेरिका ने अक्टूबर 2024 में इन कंपनियों पर कार्रवाई करते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने रूस को ऐसे उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराई, जिनका इस्तेमाल सैन्य या दोहरे उपयोग (ड्यूल-यूज) वाले क्षेत्रों में किया जा सकता है।

गैलेक्सी बेयरिंग्स पर रोलर बेयरिंग्स और संबंधित उपकरण रूस भेजने का आरोप था। वहीं, शौर्य एरोनॉटिक्स पर रडार सिस्टम, रेडियो नेविगेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की आपूर्ति करने का दावा किया गया था।

आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज पर रूस की प्रतिबंधित कंपनी को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स भेजने का आरोप लगा था, जबकि लोकेश मशीन्स लिमिटेड पर रूस की निर्माण कंपनियों को मशीन टूल्स उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।

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क्या बदल रहे हैं भारत-अमेरिका के रिश्ते?

प्रतिबंध हटाने के फैसले के बाद राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में इसकी अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। कुछ विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि यह केवल कानूनी समीक्षा और जांच पूरी होने के बाद लिया गया प्रशासनिक निर्णय भी हो सकता है। हाल के महीनों में व्यापार, टैरिफ और वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर भारत और अमेरिका के बीच कई दौर की बातचीत हुई है।

प्रतिबंध हटने से संबंधित कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार करना पहले की तुलना में आसान हो सकता है। साथ ही विदेशी साझेदारों और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ने की संभावना है।

Location :  New Delhi

Published :  1 July 2026, 4:01 PM IST