फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन के जरिए ईरान की मदद का आरोप, भारत की कई कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध

ईरान के तेल कारोबार में मदद के आरोप में भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और कई भारतीय कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है। सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी भारत में रहकर एक ऐसे नेटवर्क को चला रहे थे, जो ईरान के तेल की सप्लाई करने वाले जहाजों को फर्जी दस्तावेज और समुद्री रजिस्ट्रेशन उपलब्ध कराता था।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 November 2026, 9:29 AM IST

New Delhi: ईरान के तेल कारोबार में मदद के आरोप में भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और कई भारतीय कंपनियों के खिलाफ अमरिका ने कार्रवाई की है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बुधवार को इन सभी पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी भारत में रहकर एक ऐसे नेटवर्क को चला रहे थे, जो ईरान के तेल की सप्लाई करने वाले जहाजों को फर्जी दस्तावेज और समुद्री रजिस्ट्रेशन उपलब्ध कराता था। आरोप है कि यह काम चंडीगढ़ से किया जा रहा था। अमेरिका का दावा है कि इस नेटवर्क की मदद से ईरानी तेल ले जाने वाले जहाज अपनी पहचान छिपाकर समुद्र में काम करते रहते थे। इन जहाजों को फर्जी झंडे और प्रमाणपत्र दिए जाते थे, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद अपना कारोबार जारी रख सकें। इनमें ईरान की सेना और उससे जुड़े संगठनों के लिए काम करने वाले जहाज भी शामिल बताए गए हैं।

अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में आए कई भारतीय नागरिक और कंपनियां

अमेरिका ने यह कदम ट्रंप प्रशासन के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत उठाया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की तेल बिक्री और दूसरे आर्थिक कारोबार से होने वाली कमाई पर रोक लगाना है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह को भी प्रतिबंधित लोगों की सूची में शामिल किया है। मंत्रालय का कहना है कि ये दोनों सुनील कुमार शर्मा के नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों में निदेशक के पद पर काम कर रहे थे। इसके अलावा भारत में मौजूद इस नेटवर्क से जुड़ी नौ कंपनियों और संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए आरोप लगाया कि सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद ने समुद्री धोखाधड़ी के जरिए ईरान के गुप्त तेल परिवहन नेटवर्क को मदद पहुंचाई। इस नेटवर्क को 'शैडो फ्लीट' कहा जाता है। आरोप है कि इनके जरिए प्रतिबंध झेल रहे जहाजों को फर्जी झंडे और समुद्री प्रमाणपत्र दिए जाते थे, जिससे वे अपनी पहचान छिपाकर तेल का परिवहन कर सकें।

चंढ़ीगढ से चल रहा था फर्जी रजिस्ट्रेशन( AI Generated ig)

चंडीगढ़ से चल रहा था फर्जी रजिस्ट्रेशन का खेल, कई देशों के नाम पर बनाई गईं वेबसाइटें

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के दावे के मुताबिक, सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद चंडीगढ़ से इस पूरे नेटवर्क को चला रहे थे। आरोप है कि दोनों ने अलग-अलग देशों के अधिकारियों के नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल करके फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन तैयार किए थे। समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, दंपती ने कई वेबसाइटें भी बनाई थीं। इन वेबसाइटों के जरिए दावा किया जाता था कि वे अलग-अलग देशों की तरफ से जहाजों का रजिस्ट्रेशन करने, उन्हें राष्ट्रीय झंडा देने, नाविकों को ट्रेनिंग देने और जहाजों की जांच से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। जबकि संबंधित देशों की सरकारों ने उन्हें ऐसी सेवाएं देने की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस कथित गतिविधि की शुरुआत साल 2014 में हुई थी। उस समय दंपती ने कैरेबियाई देश डोमिनिका के समुद्री रजिस्ट्रेशन प्राधिकरण के प्रतिनिधि के रूप में खुद को पेश किया था। इसके बाद साल 2023 में सुनील कुमार शर्मा ने सिंगापुर में 'एस्वातिनी मैरीटाइम अफेयर्स एंड इंटरनेशनल शिप रजिस्ट्री पीटीई लिमिटेड' नाम से एक कंपनी बनाई। हालांकि, एस्वातिनी के अधिकारियों ने इस कंपनी से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद अमेरिकी मंत्रालय का आरोप है कि इस कंपनी के जरिए ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सेवाएं दी जा रही थीं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ऐसी कई वेबसाइटों का भी पता लगाया, जो अरूबा, गुयाना, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते जैसे देशों के नाम पर समुद्री रजिस्ट्रेशन सेवाएं देने का दावा करती थीं। अमेरिका के मुताबिक, कई प्रतिबंधित जहाजों ने इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का तेल दूसरे देशों तक पहुंचाया।

फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन में इस्तेमाल का आरोप

अमेरिका ने सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करते हुए भारत की कई कंपनियों और संस्थाओं को भी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया है। इनमें ओशनिएक टेक्नोलॉजीज इंडिया, आर्यवर्त शिप मैनेजमेंट, प्रिसेप्ट ट्रेंड्स, पॉलिनेशिया मैरीटाइम, एलेक्सार्या फिनसर्व, एलेक्सार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, विहाराबोटिंग और आर्यवर्त मैरीटाइम एंड एजुकेशनल ट्रस्ट के नाम शामिल हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि ओशनिएक टेक्नोलॉजीज इंडिया का इस्तेमाल जहाजों के फर्जी रजिस्ट्रेशन और उनसे जुड़े दस्तावेज तैयार करने के लिए किया जाता था। मंत्रालय के मुताबिक, जब सुनील कुमार शर्मा की गतिविधियों पर जांच तेज हुई और निगरानी बढ़ाई गई, तो उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद ने नेटवर्क से जुड़ी कई कंपनियों की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली। अमेरिका का दावा है कि इन कंपनियों के जरिए कथित तौर पर प्रतिबंधों से बचने के लिए ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को मदद पहुंचाई जा रही थी। हालांकि, ये सभी आरोप अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से लगाए गए।

ईरान का साथ देने वालों पर भी होगी कारवाई, अमेरिकी वित्त मंत्री की सख्त चेतावनी 

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा है कि ईरान की आर्थिक गतिविधियों में मदद करने वाले लोगों और संगठनों के खिलाफ अमेरिका आगे भी प्रतिबंध लगाता रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान को जमीन, समुद्र या हवाई रास्ते से किसी भी तरह की सहायता देने वालों को अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत अमेरिका का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उनके मुताबिक, इस अभियान में देशों और संगठनों को अमेरिका का साथ देना होगा, वरना उन्हें इसके विरोध में माना जाएगा। वहीं, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन को लेकर भी चिंता जताई है। मंत्रालय का कहना है कि ऐसे दस्तावेजों की मदद से जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और समुद्री नियमों को आसानी से तोड़ सकते हैं। इन जहाजों के पास कई बार वैध बीमा भी नहीं होता। ऐसे में अगर समुद्र में कोई दुर्घटना या तेल रिसाव जैसी घटना होती है, तो संबंधित देशों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा, बुधवार को अमेरिका ने तुर्किये की कंपनी 'फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक' पर भी प्रतिबंध लगाए। कंपनी पर आरोप है कि वह ईरान के प्रतिबंधित विमानन क्षेत्र को लगातार मदद दे रही थी। अमेरिका की ये सभी कार्रवाइयां ईरान की तेल से होने वाली कमाई और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और संघर्ष जारी है।

Location :  New Delhi

Published :  5 November 2026, 9:29 AM IST