मुझे उनसे कोई डील नहीं करनी… वे बीमार मानसिकता के लोग हैं, ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को क्यों बताया टाइम वेस्ट?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक तीखे बयान और बेहद सख्त फैसले ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। ईरान के साथ चल रहा बड़ा समझौता अचानक खत्म हो गया है और सैन्य मोर्चे से लेकर आर्थिक नाकेबंदी तक, ट्रंप ने चौकाने वाले कदम उठाए हैं। आखिर क्या है पूरा मामला?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 8 July 2026, 4:12 PM IST

Washington: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा अंतरिम युद्धविराम (सीजफायर) पूरी तरह से खत्म हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के साथ हुए अंतरिम समझौते को पूरी तरह से समाप्त घोषित करते हुए इसे 'समय की बर्बादी' करार दिया है। कतर में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत के बेनतीजा रहने और होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हुए हमलों के बाद, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है।

'वे बीमार मानसिकता वाले लोग हैं'- ट्रंप का तीखा हमला

तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से पहले मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। नाटो महासचिव मार्क रुटे की मौजूदगी में ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा-

"मेरे हिसाब से, यह (सीजफायर) खत्म हो चुका है। मैं उनसे कोई लेन-देन नहीं करना चाहता। वे घटिया लोग हैं। वे बीमार मानसिकता वाले लोग हैं और उनकी अगुवाई भी बीमार मानसिकता वाले लोग ही करते हैं। जहां तक मेरी बात है, उनके साथ किसी भी तरह का लेन-देन करना सिर्फ और सिर्फ समय की बर्बादी है।"

जब ट्रंप से सीजफायर के मौजूदा स्टेटस के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया, "मेरे हिसाब से, यह खत्म हो गया है। उनके साथ डील करना बस टाइम वेस्ट करना है।"

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पाकिस्तान की मध्यस्थता और कतर वार्ता रही पूरी तरह नाकाम

गौरतलब है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच इस अंतरिम युद्धविराम समझौते को कराने में पाकिस्तान ने मध्यस्थता (Mediator) की भूमिका निभाई थी। इस समझौते का मुख्य मकसद दोनों देशों को एक स्थायी समाधान और समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों का समय देना था।

इसी सिलसिले में कतर में दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर भी चला, लेकिन पिछले हफ्ते यह बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। बातचीत के नाकाम होते ही तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया और अमेरिकी सेना ने बीते मंगलवार को ईरान पर नए सिरे से हवाई हमले शुरू कर दिए, जिसने समझौते की बची-खुची उम्मीदों को भी दफन कर दिया।

ईरान के तेल व्यापार पर अमेरिका का बड़ा प्रहार, लाइसेंस रद्द

सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि अमेरिका ने आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान की कमर तोड़ने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को अमेरिका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की इजाजत देने वाला विशेष लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया।

दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में हाल ही में तीन तेल टैंकरों पर हमले हुए थे, जिसके बाद अमेरिका ने यह सख्त कदम उठाया। दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत अमेरिकी ट्रेजरी ने इसी साल 22 जून को एक सामान्य लाइसेंस जारी किया था। इस लाइसेंस के जरिए ईरान को अपने कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों को 21 अगस्त तक बेचने की सशर्त छूट मिली थी।

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17 जुलाई तक का अल्टीमेटम: समेटना होगा सारा कारोबार

अमेरिकी प्रशासन ने इस रियायत को समय से पहले खत्म करते हुए ईरान को बेहद कड़ा अल्टीमेटम दिया है। मंगलवार को लाइसेंस रद्द करने के साथ ही अमेरिका ने ईरान को अपने किसी भी चल रहे लेन-देन या व्यापारिक गतिविधियों को समेटने (Wind down) के लिए सिर्फ 17 जुलाई तक का समय दिया है।

ट्रंप के इस सख्त फैसले और तीखे बयानों से साफ है कि अमेरिका अब ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते या नरमी के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव और ज्यादा बढ़ने की आशंका गहरा गई है।

Location :  Washington

Published :  8 July 2026, 4:12 PM IST