पाकिस्तानी PM ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर किया साइन, विपक्ष ने चेताया खतरा; कहा- पाकिस्तान को खतरे में डालने वाला कदम

शहबाज शरीफ ने दावोस में ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान की भूमिका, विपक्ष और पत्रकारों की आलोचना, बोर्ड के वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव, और UN के संभावित हाशिए पर जाने की आशंका पर केंद्रित है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 23 January 2026, 7:11 PM IST

Islamabad: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गुरुवार को दावोस में अमेरिका के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के चार्टर पर हस्ताक्षर किए। यह बोर्ड अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में गाजा में शांति स्थापित करने और पुनर्वास की प्रक्रिया को मॉनिटर करने के लिए बनाया गया है। पाकिस्तान इस बोर्ड में शामिल आठ इस्लामिक देशों में से एक है।

विपक्ष ने कहा – यह कदम पाकिस्तान के लिए खतरनाक

पाकिस्तानी मीडिया डॉन के अनुसार, विपक्षी पार्टियों ने शहबाज शरीफ के इस फैसले का विरोध किया और इसे देश हित के खिलाफ बताया। सांसद अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने कहा कि बोर्ड फिलिस्तीनियों के अधिकारों का हनन कर रहा है और पाकिस्तान, जो कश्मीर जैसे मुद्दों पर UN के प्रस्तावों पर जोर देता है, अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।

पत्रकार जाहिद हुसैन का विचार

प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक जाहिद हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान ने जल्दबाजी में इस निर्णय को लिया। उन्होंने इसे ट्रंप की जोखिम भरी नीति का हिस्सा बताया और कहा कि बोर्ड बस अमीरों का क्लब बन रहा है, जबकि फिलिस्तीनियों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। हुसैन ने चेताया कि पाकिस्तान ट्रंप की ‘गुड बुक्स’ में रहने के लिए उनकी नीतियों का पालन कर रहा है, जो एक जिम्मेदार विदेश नीति नहीं है।

सेना और कूटनीतिक नजदीकियां

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान को इस बोर्ड में शामिल करने की वजह उसकी बढ़ती सैन्य ताकत और मिडिल ईस्ट में बदलती कूटनीतिक स्थिति है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाया है। इसके अलावा, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम और ट्रंप के बीच हाल ही में हुई मुलाकातें भी चर्चा का विषय रही हैं।
टैरिफ और तनाव: अमेरिका ने 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाया, ग्रीनलैंड पर गुस्सा बढ़ा

ट्रम्प की योजना और बोर्ड का विस्तार

ट्रम्प ने पिछले साल सितंबर 2025 में गाजा युद्ध को समाप्त करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। बोर्ड में शामिल देशों को तीन साल से अधिक सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे और उन्होंने इसे केवल गाजा तक सीमित न रखकर वैश्विक संघर्षों के समाधान में इस्तेमाल करने की योजना बनाई है।

विपक्ष और आलोचकों की चिंताएं

तहरीक-ए-तहफ्फुज के नेता मुस्तफा नवाज खोखर ने कहा कि बोर्ड में बिना संसद या सार्वजनिक बहस के शामिल होना सरकार की मनमानी है। उन्होंने इसे औपनिवेशिक परियोजना बताया और कहा कि बोर्ड ट्रंप को अत्यधिक शक्तियां देता है। अगर बोर्ड ईरान या अन्य देशों के खिलाफ कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान खुद को खतरनाक जिम्मेदारियों में फंसा सकता है।

बोर्ड में आठ इस्लामिक देश शामिल

बोर्ड ऑफ पीस में पाकिस्तान के अलावा कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और UAE शामिल हैं। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों के विदेश मंत्रियों ने दोहा में साझा बयान जारी कर बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि की। भारत और ज्यादातर यूरोपीय देशों ने समारोह में भाग नहीं लिया।

अमेरिका का सबसे खतरनाक हथियार ईरान के करीब, USS अब्राहम लिंकन क्यों बना दुनिया की चिंता?

वैश्विक स्तर पर प्रभाव

ट्रम्प का उद्देश्य बोर्ड को केवल गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रखना है। इसका वैश्विक स्तर पर दखल और UN की भूमिका को प्रभावित करने का भी अनुमान लगाया जा रहा है। रूस इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, फ्रांस ने इसे ठुकरा दिया है, और ब्रिटेन व चीन ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।

Location : 
  • Islamabad

Published : 
  • 23 January 2026, 7:11 PM IST