पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने ब्रह्मोस मिसाइल की बताई ताकत, भारत पर उठाए सवाल

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य ताकत और परमाणु रणनीति को लेकर बहस एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है।

Updated : 21 October 2026, 2:33 PM IST
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नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य ताकत और परमाणु रणनीति को लेकर बहस एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और राष्ट्रीय कमान प्राधिकरण (NCA) के सलाहकार मजहर जमील ने लंदन में एक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक कार्यक्रम के दौरान भारत की सुरक्षा नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयानों में सबसे ज्यादा चर्चा उस दावे की हो रही है, जिसमें उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल को पारंपरिक और परमाणु, दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम बताया।

हालांकि, इन आरोपों और स्थापित तथ्यों के बीच अंतर समझना जरूरी है। जमील के दावों को भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में उनके मौजूदा आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।

अजीत डोभाल का नाम लेकर क्या बोले पाकिस्तानी जनरल?

मजहर जमील ने 13 अक्टूबर को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के एक कार्यक्रम में दक्षिण एशिया में परमाणु प्रतिरोध और रणनीतिक स्थिरता पर अपनी बात रखी। वह पाकिस्तान की नेशनल कमान अथॉरिटी के सलाहकार रह चुके हैं और 2015 से 2017 के बीच सामरिक योजना प्रभाग (SPD) के महानिदेशक भी रहे हैं।

अपने संबोधन में जमील ने भारत पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया। उन्होंने इन दावों को अजीत डोभाल से जोड़ते हुए कथित तौर पर इसे 'डोभाल सिद्धांत' करार दिया।

उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में 1971 के मुक्ति वाहिनी आंदोलन, 1980 के दशक में श्रीलंका के लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) और अफगानिस्तान में 2001 से 2014 के दौरान भारत की भूमिका का उल्लेख किया।

हालांकि, ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देना अपने आप में पाकिस्तान में सक्रिय संगठनों को भारत के समर्थन का प्रमाण नहीं है। जमील के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

ब्रह्मोस मिसाइल पर ऐसा क्या दावा किया, जिसने खींचा ध्यान?

जमील के संबोधन का दूसरा बड़ा हिस्सा भारत की ब्रह्मोस मिसाइल और ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा था। उन्होंने दावा किया कि ब्रह्मोस जैसे हथियारों की दोहरी क्षमता क्षेत्र में परमाणु संघर्ष का जोखिम बढ़ा सकती है। उनका तर्क था कि जब किसी मिसाइल की भूमिका को लेकर विरोधी देश के मन में संदेह हो, तो सैन्य संकट के दौरान गलत आकलन की आशंका बढ़ जाती है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण तथ्यात्मक अंतर है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पारंपरिक हथियार ले जाने वाली मिसाइल के रूप में जाना जाता है। भारत की परमाणु कमान व्यवस्था से इसे जुड़ा हुआ बताने के लिए विश्वसनीय प्रमाण जरूरी होंगे। जमील का दावा अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान परमाणु हथियारों से लैस ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया था।

उन्होंने मार्च 2022 में भारत से गलती से लॉन्च हुई ब्रह्मोस मिसाइल के पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में गिरने की घटना का भी जिक्र किया। भारत ने उस घटना को आकस्मिक बताया था। जमील ने इसे भारत की सैन्य कमान और नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया।

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान की चिंता क्यों?

मजहर जमील ने अपने संबोधन में मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भारत की कार्रवाई ने दक्षिण एशिया को परमाणु तबाही के करीब पहुंचा दिया था। उन्होंने पाकिस्तान के रणनीतिक संयम को हालात बिगड़ने से रोकने का श्रेय दिया।

यह पाकिस्तान का पक्ष है। उनके बयान से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि परमाणु संघर्ष की स्थिति वास्तव में कितनी करीब थी या इसके लिए किसी एक पक्ष को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके लिए सैन्य घटनाक्रम, दोनों देशों के आधिकारिक बयानों और स्वतंत्र आकलनों को साथ रखकर देखना होगा।

फिर भी, ब्रह्मोस मिसाइल, सटीक हमले करने वाले आधुनिक हथियारों और परमाणु प्रतिरोध का एक साथ उल्लेख यह दिखाता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संकट के दौरान गलतफहमी को लेकर चिंताएं रणनीतिक बहस का हिस्सा बनी हुई हैं।

भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति पर भी उठाए सवाल

जमील ने भारत की परमाणु नीति पर सवाल उठाते हुए 'नो फर्स्ट यूज' यानी पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करने की नीति को भी चुनौती दी। भारत के 1999 के सार्वजनिक परमाणु सिद्धांत के मसौदे में पहले परमाणु हमला नहीं करने, विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोध और परमाणु हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई पर जोर दिया गया था।

जमील ने इस नीति की विश्वसनीयता पर संदेह जताया और भारत की रणनीतिक क्षमताओं को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जोखिम बताया। हालांकि, किसी देश की संभावित सैन्य क्षमता और उसके घोषित परमाणु सिद्धांत के बीच अंतर होता है। किसी संभावित रणनीति को वास्तविक नीति मानने से पहले उसके समर्थन में प्रमाण जरूरी हैं।

पाकिस्तान का संदेश या क्षेत्रीय सुरक्षा पर वास्तविक चेतावनी?

मजहर जमील के बयान ऐसे समय आए हैं, जब भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य क्षमताओं, परमाणु प्रतिरोध और भविष्य में संभावित टकराव को लेकर बहस जारी है। उनके संबोधन में भारत की सैन्य नीति की आलोचना के साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत के रणनीतिक व्यवहार पर सवाल उठाने की अपील भी दिखाई देती है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ब्रह्मोस मिसाइल को परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बताने जैसे दावों को बिना सत्यापन के तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। इसी तरह, भारत पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के आरोपों की भी स्वतंत्र जांच और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर पड़ताल होनी चाहिए।

Location :  New Delhi

Published :  21 October 2026, 2:33 PM IST

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