
ट्रंप के टॉरगेट पर लॉरेंस बिश्ननोई (सोर्स- Pinterest)
New Delhi: कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी संसद में खड़े होकर जिस 'क्रेडिबल एलिगेशन' (ठोस आरोपों) का ढिंढोरा पीटा था, वह अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार का हाथ बताने वाले ट्रूडो के दावों को खुद उनकी अपनी पुलिस ने खारिज कर दिया है। 7 जुलाई को कनाडा के सीबीसी (CBC) चैनल पर एक इंटरव्यू के दौरान जब पत्रकार ने पुलिस डिप्टी कमिश्नर लीसा मोलैंड से पूछा कि क्या इस जांच में भारत सरकार के खिलाफ कोई सबूत मिला है?
इस पर डिप्टी कमिश्नर ने साफ लफ्जों में कहा कि पूरी जांच सिर्फ 'ऑर्गेनाइज्ड क्राइम' (संगठित अपराध) पर केंद्रित है और अब तक भारत सरकार या किसी भारतीय अधिकारी को इस हत्याकांड से जोड़ने वाला कोई सबूत सामने नहीं आया है। इस बड़े खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ट्रूडो के दावों की हवा निकाल दी है।
यह सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) और कनाडा पुलिस ने मिलकर भारत से जुड़े तीन बड़े इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट्स के खिलाफ 'ऑपरेशन हार्डबॉल' शुरू किया। इस महा-अभियान के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के 50 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई।
इस क्रैकडाउन में कुल 37 आरोपियों में से 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 11 अकेले कैलिफोर्निया में पकड़े गए। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा जारी चार्जशीट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के दो मुख्य सरगना (लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया) भारत की जेलों में बंद रहते हुए भी मोबाइल और इंटरनेट के जरिए दुनिया भर में अपना अंडरवर्ल्ड नेटवर्क चला रहे हैं।
एफबीआई ने इस सिंडिकेट के नॉर्थ अमेरिका प्रमुख गोल्डी बराड़ पर 50,000 डॉलर का इनाम घोषित किया है और हेल्पलाइन नंबर (1-800-CALL-FBI) जारी किया है। जांच के मुताबिक, यह गैंग बंदूक से ज्यादा 'डर' को अपना ब्रांड बनाकर काम करता है। सोशल मीडिया पर हत्याओं की जिम्मेदारी लेना, गरीब व नाबालिग युवाओं को गैंग में भर्ती करना और भारतीय प्रवासियों से लाखों डॉलर की रंगदारी वसूलना इनका मुख्य काम है।
लॉस एंजेलिस में एक बिजनेसमैन से 50 लाख डॉलर (करीब 41 करोड़ रुपये) तक की रंगदारी मांगी गई थी। इस सिंडिकेट का जाल इतना गहरा है कि अकेले जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क के दुनिया भर में 1,000 से अधिक शूटर और सहयोगी फैले हुए हैं।
इस जांच में भारतीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय के शीर्ष अभियोजक बिल एस्सायली ने खुलासा किया कि पंजाब का एक एसएचओ (SHO) भी अमेरिका में बसे एक परिवार से 4 लाख डॉलर की रंगदारी मांगने में शामिल था। उसने पीड़ित परिवार को धमकी दी थी कि अगर पैसे नहीं दिए, तो भारत में रह रहे उनके रिश्तेदारों पर हत्या का झूठा केस दर्ज कर दिया जाएगा। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया और होशियारपुर के एसएसपी ने टांडा थाने के एसएचओ गुरिंदरजीत सिंह नागरा को तुरंत लाइन हाजिर कर जांच के आदेश दे दिए हैं।
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'ऑपरेशन हार्डबॉल' के बाद अब सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सवाल लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण (Extradition) को लेकर उठ रहा है। कनाडा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसियां निज्जर हत्याकांड और रंगदारी के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए भारत सरकार से लॉरेंस बिश्नोई के प्रत्यर्पण की मांग कर सकती हैं। वर्तमान में लॉरेंस भारत की हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद है, लेकिन इस नए अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बाद भारत और अमेरिका के बीच कानूनी और कूटनीतिक हलचल तेज होना तय माना जा रहा है।
Location : New Delhi
Published : 10 July 2026, 11:30 AM IST