रिकॉर्ड जीत के बाद सत्ता पर कब्जा, नेपाल को मिला 47वां प्रधानमंत्री; जानें मेयर से पीएम तक बालेंद्र शाह का सफर

नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेंद्र शाह ने देश के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। रिकॉर्ड जीत और युवा छवि के साथ शाह के नेतृत्व में नई सरकार से बड़े बदलावों की उम्मीद की जा रही है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 27 March 2026, 1:51 PM IST

Kathmandu: नेपाल की सत्ता की गलियों में एक बड़ा 'पावर शिफ्ट' हुआ है। जैसे किसी सियासी खेल में आखिरी चाल अचानक सब कुछ बदल देती है, वैसे ही इस बार नेपाल की राजनीति में एक नया चेहरा सबसे ऊपर पहुंच गया है। पुराने दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए बालेंद्र शाह ने सत्ता की कुर्सी पर कब्जा कर लिया है। यह सिर्फ एक शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की एंट्री मानी जा रही है, जहां युवा नेतृत्व और बदलाव की उम्मीदें आम लोगों के बीच तेजी से उभर रही हैं।

नेपाल को मिला नया प्रधानमंत्री

नेपाल में आज से एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हो गई है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेंद्र शाह को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। रामचंद्र पौडेल ने संविधान के आर्टिकल 76(1) के तहत उन्हें इस पद पर नियुक्त किया। इसके साथ ही शाह नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री बन गए हैं।

कैसे खुला सत्ता का रास्ता?

प्रधानमंत्री बनने का रास्ता गुरुवार को ही साफ हो गया था, जब राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने बालेंद्र शाह को अपने संसदीय दल का नेता चुना। पार्टी ने हालिया चुनावों में लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल किया, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

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रिकॉर्ड जीत से चौंकी सियासत

बालेंद्र शाह की जीत सिर्फ जीत नहीं थी, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी थी। उन्होंने झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को 49,614 वोटों के भारी अंतर से हराया। शाह को 68,348 वोट मिले, जबकि ओली को सिर्फ 18,734 वोटों से संतोष करना पड़ा। यह अंतर 1991 के बाद से नेपाल के संसदीय चुनावों में सबसे बड़ा माना जा रहा है। इस जीत ने साफ कर दिया कि देश की जनता बदलाव चाहती है और नए नेतृत्व पर भरोसा जता रही है।

नई सरकार, नए चेहरे

शाह के नेतृत्व वाली सरकार के लिए 14 मंत्रियों के नाम लगभग तय कर लिए गए हैं। इसमें सुदन गुरुंग को गृह मंत्री बनाए जाने की चर्चा तेज है। गुरुंग ‘जेन जी’ आंदोलन के चलते सुर्खियों में आए थे और गोरखा-2 सीट से जीतकर संसद पहुंचे हैं। नई कैबिनेट में युवा चेहरों को जगह मिलने की संभावना है, जिससे सरकार की कार्यशैली में तेजी और नए विचार देखने को मिल सकते हैं।

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इंजीनियर से प्रधानमंत्री तक का सफर

27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में जन्मे बालेंद्र शाह का सफर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई काठमांडू में पूरी की और फिर भारत जाकर विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। उनका तकनीकी बैकग्राउंड उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास की गहरी समझ देता है। यही वजह है कि जब वह काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बने, तो उन्होंने कई सुधारात्मक कदम उठाए और अपनी अलग पहचान बनाई। 2022 में उन्होंने एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मेयर का चुनाव जीता था, जिसने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

Location : 
  • Kathmandu

Published : 
  • 27 March 2026, 1:51 PM IST