नेपाल में तबाही के बाद जिंदगी पटरी पर लाने की जंग: 65 स्कूल खोलने की तैयारी, भारत के सीमांत क्षेत्रों में अलर्ट

नेपाल में भीषण बाढ़-जलप्रलय के 13वें दिन राष्ट्रीय शोक मनाया गया। तबाही के बाद अब मासूमों को मानसिक सदमे से उबारने के लिए 65 स्कूल खोले जा रहे हैं, जबकि भारत के सीमावर्ती जिलों में जापानी इंसेफेलाइटिस फैलने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 8 September 2026, 10:56 AM IST

Kathmandu: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय को करीब दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन तबाही का मंजर आज भी दिल दहला देने वाला है। इस आपदा में 1,380 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 5,500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।

जलप्रलय के 13वें दिन पूरे देश में राष्ट्रीय शोक मनाया गया। इस दौरान सरकारी इमारतों पर राष्ट्रध्वज आधा झुका रहा और लोगों ने मोमबत्तियां व दीये जलाकर अपनों को खोने के गम में श्रद्धांजलि दी।

दहशत के साए में बचपन: 65 स्कूल खोलने की तैयारी

बाढ़ का सबसे गहरा मानसिक असर मासूम बच्चों पर पड़ा है। नुवाकोट और रसुवा जैसे इलाकों में बच्चे गहरे मानसिक आघात (सदमे) से जूझ रहे हैं। कोई रात को चौंककर उठ जाता है तो कोई गुमसुम बैठा रहता है।

इस अदृश्य डर से बच्चों को बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग और मेडिकल टीमों की मदद ली जा रही है। जिंदगी को सामान्य बनाने की दिशा में प्रशासन बुधवार से नुवाकोट के बिधुर में 65 स्कूलों को दोबारा खोलने जा रहा है, ताकि बच्चे अपनी पढ़ाई और सामान्य दिनचर्या से जुड़ सकें।

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सिलक्यारा से भी कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन

चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में अभी भी करीब 121 लोगों के फंसे होने की आशंका है। भारत के सिलक्यारा सुरंग हादसे में 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने वाले ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स भी इस बचाव अभियान में जुटे हैं। उनके मुताबिक, नेपाल में राहत और बचाव कार्य सिलक्यारा की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहाँ एक साथ कई दुर्गम स्थानों पर रेस्क्यू चलाना पड़ रहा है।

भारत के सीमांत जिलों में मंडराया जापानी इंसेफेलाइटिस का खतरा

नेपाल की इस तबाही का सीधा असर अब भारत के पूर्वी सीमावर्ती इलाकों पर पड़ने लगा है। महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया जैसे गंडक नदी के तराई क्षेत्रों में बाढ़ का जमा पानी और दलदल मच्छर पनपने की जगह बन गए हैं। जंतु विशेषज्ञों का कहना है कि जमा दूषित पानी मादा क्यूलेक्स मच्छर के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है, जो जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) की मुख्य वाहक है।

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स्थानीय लोगों की बढ़ी चिंताएं

सीमावर्ती गांवों में हाईग्रेड फीवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते एहतियाती कदम नहीं उठाए गए और जांच अभियान नहीं चलाया गया, तो तराई के इन जिलों को बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।

Location :  Kathmandu

Published :  8 September 2026, 10:56 AM IST