ग्लेशियर फटा, नदी बनी काल: नेपाल बाढ़ में अब तक 1,243 मौतें, भारत की सीमा में बहकर आए शव; देखें दिल दहलाने वाली रिपोर्ट

नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर फटने से आई भीषण बाढ़ में 1243 लोगों की मौत हो चुकी है और 4875 लोग लापता हैं। भारत की नदियों में भी बहकर शव पहुंच रहे हैं। 19 हजार जवान राहत कार्य में जुटे हैं और महामारी का खतरा मंडरा रहा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 3 September 2026, 10:11 AM IST

Kathmandu: नेपाल और चीन-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी के जलग्रहण क्षेत्र में ग्लेशियर फटने और हिमस्खलन के बाद आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने चारों तरफ तबाही के निशान छोड़ दिए हैं।

26 अगस्त को आए इस प्राकृतिक प्रकोप के बाद से अब तक 1,243 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4,875 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। अचानक आई इस जल-प्रलय से कई गांव पूरी तरह नक्शे से मिट चुके हैं और हजारों जिंदगियां मलबे के नीचे दफन हो गई हैं।

अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और स्थानीय लोगों पर टूटा पहाड़

राहत और बचाव कार्यों में जुटी नेपाल पुलिस और सशस्त्र बलों के अनुसार, मृतकों में पुरुषों, महिलाओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में मासूम बच्चे भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा चिंता लापता 4,875 लोगों को लेकर है, जिनमें स्थानीय निवासियों के साथ भारी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं।

जो शव बरामद हो रहे हैं, उनमें से कई की हालत इतनी जर्जर है कि उनकी पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो रहा है, जिसके चलते प्रशासन को सामूहिक अंतिम संस्कार का सहारा लेना पड़ रहा है।

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सीमा पार पहुंची जल-प्रलय, भारत में मिले शव

बाढ़ के रौद्र रूप का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तेज बहाव में बहकर दर्जनों शव भारतीय सीमा तक पहुंच गए। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में नारायणी नदी से भारतीय पुलिस ने कई शवों को बाहर निकालकर नेपाल प्रशासन को सौंपा है।

वर्तमान में सेना और पुलिस के 19,000 से अधिक जवान रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं, जिन्होंने अब तक लगभग 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने स्थिति को बेहद नाजुक बताते हुए वैश्विक मदद की गुहार लगाई है, जिस पर भारत और चीन ने राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी है।

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बाढ़ के बाद महामारी का नया खतरा

रेस्क्यू के बीच अब प्रभावित इलाकों में दूषित पेयजल, भुखमरी और महामारी फैलने की आहट ने सरकार की नींद उड़ा दी है। बुनियादी ढांचे के पूरी तरह ध्वस्त होने से दूरदराज के इलाकों तक दवाएं और खाना पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Location :  Kathmandu

Published :  3 September 2026, 10:11 AM IST