ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी भी मारे गए, आखिर कौन थे अराफी?

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी जगह पर अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किये गये आयातुल्ला अलीरेजा अराफी की भी एक हमले में मौत की खबर है। वे अली खामेनेई के बहुत करीबी थे।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 2 March 2026, 12:23 PM IST

Tehran: इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अब यह भी खबर आई है कि उनकी जगह पर अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किये गये आयातुल्ला अलीरेजा अराफी की भी एक हमले में मौत हो गई है। इजरायल की ओर से यह दावा किया जा रहा है। ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद में उन्हें फकीह यानि धर्मविद सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। उन्होंने अस्थायी रूप से सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियां संभाली, लेकिन अब उनके मौत की खबर है।

शनिवार को ईरान के खिलाफ की गई भयंकर कार्रवाई में अमेरिका-इजरायल ने मिलकर अपने बड़े दुश्मन और ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार डाला। इसके बाद ईरान में इस पद को लेकर अटकलें आ रही थीं कि उनके खामेनेई के बेटे मोजतबा इसे संभालने जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह महत्वपूर्ण पद धर्मविद अयातुल्ला अराफी को दिया गया। आरिफी खामेनेई के करीबी माने माने जाते थे।

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यही वजह है कि उन्हें ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद (इंटरिम लीडरशिप काउंसिल) में फकीह (धार्मिक विधिवेत्ता) सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। यह परिषद तब तक सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियां निभाती है, जब तक कि एक्सपर्ट्स की असेंबली स्थायी उत्तराधिकारी का चुनाव नहीं कर लेती।

इजरायल ईरान के युद्ध की तस्वीर

कौन थे अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी?

अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी का जन्म ईरान के यज्द राज्य में 1959 में हुआ था। 1969 में मात्र 11 साल की उम्र में इस्लामिक अध्ययन के लिए वह ईरान में स्थित एक प्रमुख और ऐतिहासिक शहर क़ोम (Qom) चले गए। मिडल ईस्ट इंस्टीट्यूट के मुताबिक 1979 की इस्लामी क्रांति के समय वे केवल 21 वर्ष के थे और पहली पीढ़ी के क्रांतिकारियों में उनकी कोई बड़ी भूमिका नहीं थी।

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1980 के दशक में भी वे अन्य युवा मौलवियों की तरह ही रहे और विशेष रूप से अलग पहचान नहीं बना पाए, लेकिन 1989 में खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद अराफी का नाम प्रमुखता के साथ ईरान के राष्ट्रीय स्तर पर आने लगा। 1992 में, मात्र 33 वर्ष की आयु में उन्हें अपने गृहनगर मेयबोद में जुमे की नमाज़ का इमाम नियुक्त किया गया, जो कि इतनी कम उम्र में एक महत्वपूर्ण पद था और खामेनेई के भरोसे का संकेत माना गया।

Location : 
  • Tehran

Published : 
  • 2 March 2026, 12:23 PM IST