ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर ईरान ने ट्रंप की धमकियों को सिरे से खारिज किया है। ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि ने कहा कि देश किसी भी हालात के लिए तैयार है और परमाणु हथियार बनाने का उसका कोई इरादा नहीं है।

अब्दुल मजीद इलाही (img source: google)
New Delhi: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों के बाद अमेरिकी प्रशासन की कड़ी बयानबाजी ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई के संकेतों के बीच अब ईरान ने खुलकर जवाब दिया है। भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने साफ कहा है कि ईरान किसी भी धमकी से डरने वाला नहीं है और हर स्थिति के लिए तैयार है।
अब्दुल मजीद इलाही ने ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका को कुछ हुआ तो ईरान “नक्शे से मिट जाएगा।” एलाही ने कहा कि इस तरह की धमकियां नई नहीं हैं और ईरान पहले भी ऐसे दबावों का सामना कर चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन की भाषा से ईरान की नीतियों और संकल्प पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प की बात भी दोहराई है। उन्होंने ईरान की मौजूदा शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बदलाव की जरूरत बताई। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पेंटागन ने एक कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को अमेरिकी सेंट्रल कमांड क्षेत्र में तैनात किया है, जिसमें पूरा मध्य पूर्व शामिल है। इस कदम से क्षेत्र में सैन्य तनाव और अधिक बढ़ गया है।
तनाव के बीच ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर फिर से स्थिति स्पष्ट की है। इलाही ने कहा कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के फतवे का हवाला देते हुए कहा कि परमाणु हथियार ईरान के लिए धार्मिक रूप से प्रतिबंधित हैं। उनके अनुसार ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन, चिकित्सा और मानवीय जरूरतों तक सीमित है।
इलाही ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान पर कड़े प्रतिबंध और सख्त निगरानी लागू की जाती है, जबकि अन्य परमाणु संपन्न देशों पर वही नियम लागू नहीं होते। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले वर्ष ईरान की परमाणु सुविधाओं को इजरायल और अमेरिका द्वारा निशाना बनाया गया था।
दुनिया देखेगी एक और जंग? ईराक-सीरिया में अमेरिका की बमबारी, 85 ईरान समर्थक आतंकी ठिकाने ध्वस्त
ईरान ने तनाव के बावजूद शांति की इच्छा जताई है। इलाही ने कहा कि ईरान क्षेत्र में स्थिरता चाहता है, लेकिन अगर संघर्ष बढ़ता है तो इसका नुकसान पूरे मध्य पूर्व को उठाना पड़ेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उम्मीद जताई कि वैश्विक संस्थाएं निष्पक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगी।