
एच-1बी वीजा पर सख्ती (Img: AI Generated Image)
New Delhi: अमेरिका में काम करने का सपना देखने वाले विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर टेक सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए H-1B वीजा को लेकर नियम और सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा है कि H-1B वीजा का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस व्यवस्था में बदलाव के लिए करीब 1 लाख डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग एक करोड़ रुपये की फीस का विचार सामने रखा है।
वेंस ने एक Podcast में H-1B प्रोग्राम पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रशासन यह देखना चाहता है कि किसी कंपनी की ओर से H-1B वीजा के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति वास्तव में ऐसा टैलेंट रखता हो, जिससे अमेरिकी टेक इंडस्ट्री या अर्थव्यवस्था को फायदा हो।
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उनके मुताबिक इस वीजा का मकसद किसी ऐसे अमेरिकी कर्मचारी की जगह कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारी को रखना नहीं है, जिसे वही काम करने के लिए पहले से रखा जा सकता था। उन्होंने अकाउंटेंट का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी अमेरिकी कर्मचारी को 60 हजार डॉलर मिल रहे हैं तो उसकी जगह 45 हजार डॉलर वाले विदेशी कर्मचारी को लाना H-1B प्रोग्राम का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।
वेंस ने कंपनियों की भर्ती और छंटनी के बीच के अंतर पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर कोई कंपनी यह दावा करती है कि उसे कर्मचारियों की जरूरत है, लेकिन उसी कंपनी ने हाल में बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है, तो इस स्थिति की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन ऐसे तरीकों पर भी काम कर रहा है, जिनसे H-1B का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने के बाद विदेशी कर्मचारियों को लाने से रोका जा सके।
H-1B व्यवस्था में प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की फीस सबसे ज्यादा चर्चा में है। अगस्त 2026 में अमेरिकी प्रशासन की ओर से करीब 1,03,265 डॉलर की फीस का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य विदेशी कर्मचारियों को रखने वाली कंपनियों पर बड़ा आर्थिक बोझ डालना और वीजा व्यवस्था के इस्तेमाल को अधिक चुनिंदा बनाना बताया गया है।
हालांकि H-1B नीति में बदलाव का असर सिर्फ कंपनियों पर नहीं पड़ेगा। भारत समेत कई देशों के टेक प्रोफेशनल्स भी इस व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं। खासकर भारतीय IT कर्मचारियों के लिए अमेरिका में नौकरी और वीजा की लागत से जुड़े बदलाव अहम हो सकते हैं।
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अमेरिकी प्रशासन पहले ही H-1B व्यवस्था को लेकर कई बदलावों पर काम कर रहा है। इसके साथ ही H-1B कर्मचारियों की नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड को खत्म करने का प्रस्ताव भी सामने आया है, हालांकि उस प्रस्ताव पर अंतिम प्रक्रिया बाकी है।
Location : New Delhi
Published : 16 September 2026, 9:51 AM IST