
पंडवानी गायिका तीजन बाई (सोर्स- एक्स)
New Delhi: भारतीय लोक कला जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को वैश्विक पहचान दिलाने वाली प्रतिष्ठित गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वे बीते कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं और रविवार तड़के करीब 3:15 बजे उन्होंने रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में अंतिम सांस ली। रायपुर एम्स के पीआरओ ने उनके निधन की पुष्टि की है। तीजन बाई पिछले कई हफ्तों से अस्पताल में भर्ती थीं। उनके निधन की खबर से छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश के सांस्कृतिक और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में 1956 में जन्मी तीजन बाई का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक अद्वितीय मिसाल रहा है। उन्होंने महाभारत की पारंपरिक कथा गायन शैली 'पंडवानी' को न केवल सहेजा, बल्कि उसे एक नया आयाम भी दिया। तीजन बाई ने उस दौर में पंडवानी की 'कापालिक शैली' को अपनाया, जिस पर पारंपरिक रूप से पुरुषों का वर्चस्व हुआ करता था। शुरुआत में उन्हें भारी सामाजिक विरोध और बंधनों का सामना करना पड़ा। लेकिन अपनी दमदार आवाज, कड़क अभिनय, बेजोड़ अभिनय कला और हाथ में तंबूरा लिए जब वे मंच पर उतरती थीं, तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे।
पांच दशकों से अधिक के अपने शानदार करियर में उन्होंने देश ही नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप सहित दुनिया के कई कोनों में छत्तीसगढ़ की माटी की इस कला का परचम लहराया। शुरुआती सालों में सामाजिक रुकावटों के बावजूद, उन्होंने पंडवानी को बचाए रखा और पॉपुलर बनाया। उन्होंने कलाकारों की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया और भारत की सबसे खास लोक परंपराओं में से एक को दुनिया भर में पहचान दिलाने में मदद की।
भिलाई के गांव गनियारी में जन्मी तीजन बाई के पिता का नाम हुनुकलाल परधा और माता का नाम सुखवती था। तीजन अपने नाना ब्रजलाल को महाभारत की कहानियां गाते-सुनाते देखती थीं और धीरे-धीरे उन्हें ये कहानियां याद होने लगीं। उनकी अद्भुत लगन और प्रतिभा को देखकर उमेद सिंह देशमुख ने उन्हें अनौपचारिक प्रशिक्षण भी दिया। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया था।
एक दिन ऐसा भी आया जब प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तभी से तीजन बाई का जीवन पूरी तरह बदल गया। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी समेत कई प्रतिष्ठित लोगों के सामने देश-विदेश में अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया।
RIP Asha Bhosle: 10 साल की उम्र में रिकॉर्डिंग, 12 हजार गाने और गिनीज रिकॉर्ड
लोक संस्कृति और कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए तीजन बाई को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से विभूषित किया गया था-
1988: पद्मश्री सम्मान
1994: श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान
1995/1996: संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार / सम्मान
1998: देवी अहिल्या सम्मान
2003: पद्म भूषण सम्मान
2003: डी. लिट (बिलासपुर विश्वविद्यालय)
2007: नृत्य शिरोमणि सम्मान
2016: एम एस सुब्बालक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार
2019: पद्म विभूषण सम्मान
Location : New Delhi
Published : 5 July 2026, 8:43 AM IST
Topics : Chhattisgarh Folk Artist Padma Vibhushan Teejan Bai Pandwani Singer Teejan Bai Teejan Bai Demise AIIMS Raipur Teejan Bai Passing