रैपिडो राइडर निकला गैंग का सबसे बड़ा मुखबिर, टाइगर श्रॉफ केस में खुलासा, 1 साल से सेलिब्रिटीज के घरों की वीडियो बना रहा था आरोपी
मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना की जांच में एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, 'रैपिडो' राइडर के रूप में काम करने वाला ऋतिक कुमार फिल्मी हस्तियों के घरों की रेकी कर लॉरेंस बिश्नोई गैंग को जानकारी भेज रहा था।
Mumbai: टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना की जांच में पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जो लंबे समय से फिल्मी हस्तियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। जांच एजेंसियों को शक है कि 'रैपिडो' (राइड-हेलिंग सर्विस) का राइडर, ऋतिक कुमार, करीब एक साल से मशहूर हस्तियों के घरों और उनके आस-पास के इलाकों की जानकारी जुटा रहा था और यह डेटा लॉरेंस बिश्नोई गैंग को भेज रहा था। इस बीच आरोपियों के एक होटल में ठहरने और घटना से पहले की उनकी गतिविधियों के बारे में नई जानकारियां सामने आई हैं।
'रैपिडो' राइडर बनकर जानकारी जुटाना
पुलिस जांच के अनुसार, ऋतिक कुमार ने कथित तौर पर कई मशहूर हस्तियों के ठिकानों की रेकी (निगरानी) की थी। वह उनके घरों और आस-पास के इलाकों के वीडियो बनाता था और फिर उन्हें गैंग के अन्य सदस्यों को भेज देता था। जांचकर्ताओं को शक है कि 'रैपिडो' राइडर के तौर पर काम करने से उसे फिल्मी हस्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनके घरों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने का मौका मिल गया। पुलिस का मानना है कि वह इस नेटवर्क के लिए मुखबिर का काम कर रहा था। बताया जाता है कि अंधेरी ईस्ट में शिफ्ट होने से पहले ऋतिक जुहू और गोरेगांव में रहता था।
जांच से पता चला है कि गोलीबारी के मामले में आरोपी दो व्यक्ति फूल सिंह और रेहान (उर्फ सुक्का), जिनकी उम्र 18 साल बताई जा रही है अंधेरी ईस्ट के 'आरआर रेजिडेंसी' होटल में ठहरे थे। उन्होंने 14 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक के लिए कमरा नंबर 201 बुक किया था। होटल के रिकॉर्ड के मुताबिक, अपने प्रवास के दौरान उन्होंने 'अंकित' और 'मनदीप नैन' नाम का इस्तेमाल किया था। होटल मैनेजर विक्रांत पासवान ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने अपने पहचान दस्तावेजों की कॉपी व्हाट्सएप पर भेजी थी, लेकिन वे असली दस्तावेज जमा नहीं कर पाए। उन्होंने खुद को हरियाणा का निवासी बताया था। कमरे का किराया 1,500 रुपये प्रतिदिन था। आरोप है कि ये दोनों अपने प्रवास के आखिरी दिन का किराया दिए बिना ही होटल से चले गए।
CCTV में नीला बैग लिए दिखा आरोपी
सोमवार को कमरे की जांच के दौरान, होटल के कर्मचारियों को वहां कुछ बैग और सामान मिला, जिसे आरोपी वहीं छोड़ गए थे। पुलिस को मिले CCTV फुटेज में दिख रहा है कि 18 अक्टूबर को शाम 4:12 से 4:13 बजे के बीच आरोपियों में से एक नीले रंग का बैग लेकर वहां से निकला। पुलिस को शक है कि उस बैग में पिस्तौल हो सकती है। यह भी पता चला है कि इसके बाद वे दोनों पल्सर मोटरसाइकिल पर सवार होकर वहां से भाग गए।
होटल के कर्मचारियों के अनुसार, वे दोनों लोग शांत रहते थे और अक्सर खाना खाने के लिए बाहर जाते थे। होटल के एक कर्मचारी, धीरज यादव ने पुलिस को बताया कि रविवार शाम करीब 4:00 बजे उनमें से एक व्यक्ति एक छोटा सा बैग लेकर वहां से निकला था। हालांकि, उस समय होटल के कर्मचारियों को इन लोगों की आपराधिक गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
गोलीबारी से एक दिन पहले जंगल में की गई थी प्रैक्टिस
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, 17 अक्टूबर को दोनों आरोपी ऑटो-रिक्शा से मुंबई के बाहरी इलाके में स्थित आरे जंगल गए थे। आरोप है कि उन्होंने वहां हथियारों से फायरिंग की प्रैक्टिस की थी। उन्होंने आरे कॉलोनी के जंगली इलाके तक जाने के लिए एक ऑटो-रिक्शा चालक को 400 रुपये दिए थे।
पुलिस फिलहाल आरोपियों की गतिविधियों, उनके द्वारा की गई रेकी (निगरानी) के तरीकों और किसी गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ उनके संबंधों की जांच कर रही है। इन जानकारियों की पुष्टि करना और इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता का पता लगाना चल रही जांच के मुख्य हिस्से हैं।