Happy Birthday Jugal Hansraj: ‘मोहब्बतें’ के चॉकलेटी हीरो ने कभी ठुकराई थी पहली फिल्म, फिर ऐसे बने लाखों दिलों की धड़कन

बॉलीवुड के चॉकलेटी हीरो जुगल हंसराज का सफर जितना खूबसूरत रहा, उतना ही उतार-चढ़ाव भरा भी रहा। जिस कलाकार ने बचपन में कैमरे से दूरी बनाने की कोशिश की थी, वही आगे चलकर लाखों दिलों की पसंद बन गया। 'मोहब्बतें' से मिली शोहरत और फिर अचानक लाइमलाइट से दूर होने तक उनकी कहानी में कई ऐसे मोड़ हैं, जो आपको हैरान कर देंगे।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 26 July 2026, 4:25 PM IST

Mumbai: बॉलीवुड में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो पर्दे पर आते ही अपनी मासूमियत से लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं। जुगल हंसराज भी उन्हीं सितारों में शामिल हैं। अपनी प्यारी मुस्कान, सादगी और शानदार लुक्स की वजह से उन्होंने एक दौर में युवाओं के बीच खास पहचान बनाई थी।

आज 26 जुलाई को जुगल हंसराज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। साल 1972 में मुंबई में जन्मे जुगल का फिल्मी सफर किसी आम अभिनेता जैसा नहीं रहा। एक पूर्व क्रिकेटर के बेटे होने के बावजूद उन्होंने खेल नहीं, बल्कि अभिनय की दुनिया को अपना करियर बनाया।

पहली फिल्म ही ठुकरा दी

जुगल हंसराज की फिल्मों में एंट्री बेहद दिलचस्प रही। जब मशहूर निर्देशक शेखर कपूर ने साल 1983 में फिल्म मासूम के लिए उन्हें चुना, तब जुगल काफी छोटे थे। फिल्म में उनके किरदार को रोने वाले कई भावनात्मक दृश्य करने थे। लेकिन जुगल को रोने वाले सीन से डर लग रहा था और उन्होंने शुरुआत में फिल्म करने से मना कर दिया। बाद में निर्देशक शेखर कपूर और मशहूर संगीतकार आर. डी. बर्मन ने उन्हें समझाया और वह कैमरे के सामने आने के लिए तैयार हुए।

इसके बाद उन्होंने 'मासूम' में राहुल नाम के बच्चे का किरदार निभाया और अपनी मासूम एक्टिंग से सभी का ध्यान खींच लिया।

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'मासूम' के बाद लिया ब्रेक

'मासूम' की सफलता के बाद जुगल ने कुछ समय के लिए फिल्मों से दूरी बना ली ताकि अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें। करीब 13-14 साल की उम्र में उन्होंने अभिनय से ब्रेक लिया। साल 1994 में उन्होंने फिल्म आ गले लग जा से बतौर लीड एक्टर वापसी की। खास बात यह थी कि इस फिल्म में उनकी हीरोइन उर्मिला मातोंडकर थीं, जो 'मासूम' में उनकी बड़ी बहन का किरदार निभा चुकी थीं।

'घर से निकलते ही' गाने ने फिर दिलाई पहचान

साल 1996 में आई फिल्म पापा कहते हैं के सुपरहिट गाने "घर से निकलते ही" ने जुगल हंसराज को घर-घर में पहचान दिला दी। इस गाने में उनके साथ अभिनेत्री मयूरी कांगो नजर आई थीं। उदित नारायण की आवाज और जावेद अख्तर के खूबसूरत बोलों ने इस गाने को आज भी यादगार बना दिया है।

'मोहब्बतें' ने बनाया नेशनल क्रश

जुगल हंसराज के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साल 2000 में आया, जब फिल्म मोहब्बतें रिलीज हुई। इस फिल्म में उन्होंने समीर का किरदार निभाया था। शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन जैसे बड़े सितारों के बीच भी जुगल अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे। फिल्म के बाद उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि उन्हें उस दौर का "नेशनल क्रश" तक कहा जाने लगा।

किस्मत ने नहीं दिया साथ

'मोहब्बतें' के बाद जुगल के पास फिल्मों की कमी नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने एक समय करीब 40 फिल्मों को साइन कर लिया था। लेकिन बॉलीवुड में हर फिल्म रिलीज तक नहीं पहुंचती। उनकी कई फिल्में बंद हो गईं और कई प्रोजेक्ट कभी पर्दे तक नहीं आ सके। इसका असर उनके करियर पर भी पड़ा।

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अभिनेता से लेखक-निर्देशक तक का सफर

फिल्मों से दूरी बनाने के बाद जुगल हंसराज ने अलग क्षेत्रों में भी हाथ आजमाया। साल 2008 में उन्होंने भारत की शुरुआती बड़ी एनिमेटेड फिल्मों में शामिल रोडसाइड रोमियो का लेखन और निर्देशन किया। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफलता नहीं मिली, लेकिन इसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्होंने बच्चों के लिए किताबें भी लिखीं। उनका साहित्य से जुड़ाव पिता बनने के बाद और बढ़ा।

अब कहां हैं जुगल हंसराज?

जुगल हंसराज ने साल 2014 में जैस्मीन ढिल्लों से शादी की और इसके बाद वह अमेरिका के न्यूयॉर्क में बस गए। दोनों का एक बेटा है। हालांकि वह फिल्मों से पूरी तरह दूर नहीं हुए। उन्होंने शिव शास्त्री बल्बोआ से वापसी की और बाद में नादानियां में भी नजर आए।

Location :  Mumbai

Published :  26 July 2026, 4:25 PM IST