
प्रतीकात्मक छवि (Source: Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र के जरिए आधार कार्ड बनवाने के एक बड़े मामले ने सरकारी विभागों की चिंता बढ़ा दी है। साल 2000 से 2024 के बीच यूपी के अलग-अलग जिलों से जारी 131 जन्म प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल देशभर में आधार कार्ड बनवाने के लिए किया गया। मामले में अब सीबीआई ने यूपी के चीफ रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु से रिपोर्ट मांगी है।
सीबीआई की ओर से भेजी गई सूची में शामिल सभी 131 जन्म प्रमाणपत्रों की जांच कराई जा रही है। इन प्रमाणपत्रों के नंबर और संबंधित जिलों की जानकारी भी भेजी गई है। जांच में यह पता लगाया जाना है कि संबंधित प्रमाणपत्र वास्तव में उसी जिले से जारी हुआ था या नहीं।
अगर प्रमाणपत्र जारी हुआ है, तो विभाग को उसकी सही जन्मतिथि और पते की भी पुष्टि करनी होगी। इस पूरी जांच की रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक भेजने के लिए कहा गया है।
सीबीआई की रिपोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश के 21 जिलों में जांच शुरू हो गई है। इनमें बागपत, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, गाजियाबाद, कन्नौज, इटावा, ललितपुर, कानपुर नगर, औरैया, जालौन, कुशीनगर, बदायूं, सोनभद्र, फतेहपुर, हमीरपुर, संत कबीरनगर, मिर्जापुर, कानपुर देहात, रामपुर और फर्रुखाबाद शामिल हैं।
सबसे ज्यादा प्रमाणपत्र कन्नौज से 73 बताए गए हैं। इसके बाद इटावा से 17, ललितपुर से 10 और बागपत से पांच प्रमाणपत्र सूची में शामिल हैं।
जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक इन जन्म प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करके सबसे ज्यादा आधार कार्ड पश्चिम बंगाल और असम में बनाए गए हैं। देश के दूसरे हिस्सों में भी इन प्रमाणपत्रों से आधार कार्ड बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसी वजह से अब यह आशंका जताई जा रही है कि सूची में शामिल कुछ जन्म प्रमाणपत्र फर्जी हो सकते हैं। हालांकि, इसकी वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
जन्म प्रमाणपत्र को आधार बनवाने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसी वजह से फर्जी जन्म प्रमाणपत्र तैयार कर उनका इस्तेमाल पहचान संबंधी दस्तावेज बनवाने में किए जाने की आशंका है।
अधिकारियों के मुताबिक जन्म प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अलग-अलग विभाग जिम्मेदार हैं। अस्पताल में जन्म होने पर प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग से जारी होता है। शहरी क्षेत्र में घर पर जन्म होने पर नगर निकाय और ग्रामीण क्षेत्र में घर पर जन्म होने पर पंचायतीराज विभाग के जरिए प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि प्रमाणपत्रों की जांच स्वास्थ्य विभाग, नगर निकाय और पंचायतीराज विभाग से कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट जल्द भेजी जाएगी।
Location : Lucknow
Published : 8 October 2026, 9:21 AM IST