NSE की पूर्व MD चित्रा रामकृष्ण को SC से झटका, भ्रष्टाचार केस रद्द करने से इनकार; अब ट्रायल कोर्ट में होगा फैसला

NSE की पूर्व MD और CEO चित्रा रामकृष्ण को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले को खत्म करने की मांग वाली याचिका पर हस्तक्षेप से इनकार करते हुए 'पब्लिक सर्वेंट' के सवाल को ट्रायल कोर्ट के लिए छोड़ दिया है। मामला NSE को-लोकेशन प्रकरण और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 15 September 2026, 2:59 PM IST

New Delhi: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्ण को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने चित्रा रामकृष्ण की उस याचिका को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत चल रहे मामले को चुनौती दी गई थी।

'पब्लिक सर्वेंट' हैं या नहीं, ट्रायल कोर्ट तय करेगा

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि चित्रा रामकृष्ण को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 'पब्लिक सर्वेंट' यानी लोक सेवक माना जा सकता है या नहीं। इसी आधार पर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार कानून के तहत मुकदमा चलाने की वैधता को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल पर अंतिम फैसला देने के बजाय इसे ट्रायल कोर्ट के लिए छोड़ दिया है। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे का फैसला मामले की सुनवाई के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।

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NSE निजी कंपनी है, फिर PC Act क्यों लागू हो?

चित्रा रामकृष्ण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने दलील दी थी कि NSE एक निजी कंपनी है और चित्रा रामकृष्ण किसी सरकारी पद पर नहीं थीं। ऐसे में उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 'पब्लिक सर्वेंट' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। दलील में यह भी कहा गया कि यदि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला बनता है तो भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान उन पर लागू नहीं होने चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में दखल से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले में भी हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें NSE और उसके शीर्ष अधिकारियों की भूमिका को सार्वजनिक कर्तव्य से जोड़कर देखा गया था। हाई कोर्ट ने माना था कि NSE भले ही निजी क्षेत्र की संस्था हो, लेकिन शेयर बाजार और वित्तीय व्यवस्था में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण है और वह सार्वजनिक कर्तव्य से पूरी तरह अलग नहीं है। इसी आधार पर उसके शीर्ष अधिकारियों को भ्रष्टाचार कानून के दायरे से बाहर रखने की दलील को स्वीकार नहीं किया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा- याचिका समय से पहले?

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी संकेत दिया कि इस स्तर पर हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से मामले को खत्म कराने की कोशिश जल्दबाजी थी। अदालत के मुताबिक विशेष अदालत के पास मामले की सुनवाई करने का अधिकार है और वहीं साक्ष्यों के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं चित्रा रामकृष्ण पर लागू होती हैं या नहीं।

NSE को-लोकेशन मामले से जुड़ा है केस

चित्रा रामकृष्ण के खिलाफ यह मामला NSE के चर्चित को-लोकेशन मामले से जुड़ा है। सीबीआई इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। मामले में NSE में पद के कथित दुरुपयोग और अनियमितताओं की जांच की जा रही है। चित्रा रामकृष्ण NSE की एमडी और सीईओ रह चुकी हैं। उनके कार्यकाल के दौरान NSE में कई फैसलों और संचालन से जुड़े विवाद सामने आए थे।

Location :  New Delhi

Published :  15 September 2026, 2:59 PM IST