उन्हें क्या पता था घर से आखिरी बार निकल रहे हैं, रक्षाबंधन मनाकर लौटे 4 भाइयों की लौटी लाशें; अहरौरा हादसे से उजड़े आशियाने

रक्षाबंधन पर परिवार के साथ खुशियां मनाकर चार मजदूर करीब एक सप्ताह पहले काम पर लौटे थे। उन्हें क्या पता था कि इस बार घर से निकले कदम कभी वापस नहीं आएंगे। अहरौरा के क्रशर प्लांट में कुछ मिनटों के भीतर हुए हादसे ने चार परिवारों की दुनिया उजाड़ दी।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 6 September 2026, 9:11 AM IST

Mirzapur: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अहरौरा क्षेत्र स्थित क्रशर प्लांट में शनिवार को हुए हादसे ने सोनभद्र के बड़गवां गांव के चार परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। खदान क्षेत्र में ब्लास्टिंग के दौरान हुए कंपन से एक कमरा और डग ढह गया, जिसके मलबे में दबकर चार मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में दूधनाथ विश्वकर्मा, अशोक गोंड, राकेश गोंड और लाल बहादुर शामिल बताए गए हैं। हादसे की खबर गांव पहुंचते ही वहां चीख-पुकार मच गई।

रक्षाबंधन पर परिवार के साथ बिताया था वक्त

परिजनों के मुताबिक चारों मजदूर लंबे समय से अहरौरा के खनन क्षेत्र में काम कर रहे थे। रक्षाबंधन के मौके पर सभी घर लौटे थे। परिवार के साथ त्योहार मनाया, बच्चों के साथ समय बिताया और फिर करीब एक सप्ताह पहले रोजी-रोटी के लिए दोबारा काम पर चले गए। परिवार वालों को क्या पता था कि घर से उनकी यह विदाई आखिरी साबित होगी।

चार परिवारों की खुशियां मातम में बदलीं

हादसे की सूचना मिलते ही बड़गवां गांव से परिजन और ग्रामीण घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। गांव में जिन घरों में कुछ दिन पहले रक्षाबंधन की खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और अचानक हुई मौत ने परिवारों के सामने भविष्य की चिंता खड़ी कर दी है।

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दूधनाथ के छोटे बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

दूधनाथ विश्वकर्मा के भाई राजेश विश्वकर्मा के अनुसार, दूधनाथ के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बेटे और एक बेटी हैं। बच्चों की उम्र कम है। परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के लिए मजदूरी करने वाले दूधनाथ की मौत से पत्नी और बच्चों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

बेटी की शादी का सपना संजोए थे अशोक

पूर्व प्रधान अशोक गोंड भी हादसे का शिकार हो गए। परिजनों के अनुसार उनके दो बेटे और एक बेटी है। अशोक अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे थे और परिवार में जल्द शादी की खुशियां देखने का सपना था। इसी जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए वह काम पर गए थे, लेकिन हादसे ने परिवार की उम्मीदों को ही तोड़ दिया। अशोक के पिता बसंत लाल गोंड भी गांव के प्रधान रह चुके हैं।

राकेश और लाल बहादुर के घर भी पसरा सन्नाटा

हादसे में राकेश गोंड और लाल बहादुर की भी जान चली गई। दोनों के परिवार में एक-एक संतान है। अचानक कमाने वाले सदस्य की मौत से उनके घरों में भी मातम छा गया है। गांव में एक साथ चार परिवारों पर आई इस त्रासदी से हर कोई स्तब्ध है।

ब्लास्टिंग के कंपन से ढहा कमरा और डग

जानकारी के मुताबिक अहरौरा के भगौती देई क्रशर प्लांट में शनिवार दोपहर काम चल रहा था। क्षेत्र में दोपहर करीब एक से दो बजे के बीच ब्लास्टिंग की जाती है। पत्थरों की चपेट में आने से बचने के लिए काम कर रहे मजदूर प्लांट के किनारे बने एक कमरे में चले गए थे। इसी दौरान ब्लास्टिंग के कंपन से कमरा और उससे लगा डग अचानक ढह गया। चारों मजदूर मलबे में दब गए।

पोकलैंड से निकाले गए मजदूर

हादसे के बाद क्रशर प्लांट में अफरा-तफरी मच गई। प्लांट संचालक शिव कुमार सिंह उर्फ पिंटू पटेल और वहां मौजूद अन्य लोगों ने पोकलैंड मशीन की मदद से मलबा हटाकर मजदूरों को बाहर निकाला। हालांकि तब तक चारों की मौत हो चुकी थी। प्लांट का लाइसेंस पिंटू पटेल की पत्नी नीलम के नाम पर बताया गया है।

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बिना सूचना दिए शव ले जाने की बात सामने आई

मामले में यह भी सामने आया कि प्लांट संचालक कथित तौर पर पुलिस को सूचना दिए बिना चारों शवों को ट्रक से लेकर वहां से चले गए। स्थानीय मजदूरों ने बताया कि शवों को अस्पताल ले जाने की बात कही गई थी। पुलिस टीम जब काफी देर बाद मौके पर पहुंची तो वहां प्लांट का कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। इसके बाद प्रशासन ने मलबा हटवाकर घटनास्थल की जांच की।

मौके पर पहुंचे बड़े अधिकारी

घटना की जानकारी के बाद आयुक्त, डीआईजी, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, एएसपी, एसडीएम और सीओ समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और हादसे से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई। पुलिस ने चारों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे की परिस्थितियों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर जांच की जा रही है।

पुराने सोनभद्र खनन हादसे की याद हुई ताजा

इस हादसे ने नवंबर 2025 में हुए ओबरा के बिल्ली मारकुंडी खनन हादसे की याद भी ताजा कर दी। 15 नवंबर 2025 को ड्रिलिंग के दौरान चट्टान गिरने से सात मजदूर मलबे में दब गए थे। उन्हें बाहर निकालने के लिए करीब चार दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था। अब अहरौरा हादसे में चार मजदूरों की मौत ने एक बार फिर खनन क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एक गांव से निकलीं चार अर्थियां

बड़गवां गांव के लिए यह हादसा सिर्फ चार मजदूरों की मौत नहीं, बल्कि चार परिवारों की पूरी जिंदगी बदल देने वाली त्रासदी है। कुछ दिन पहले जिन घरों में रक्षाबंधन पर अपनों के लौटने से रौनक थी, वहां अब चार परिवार अपने प्रियजनों की अंतिम विदाई की तैयारी कर रहे हैं। परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए निकले चार मजदूर अब वापस नहीं लौटेंगे।

Location :  Mirzapur

Published :  6 September 2026, 9:11 AM IST