अब डिजिटल सबूतों से खुलेगा अपराध का राज, झारखंड पुलिस ने शुरू की नई तैयारी

लातेहार टाउन हॉल में तीन दिवसीय पलामू क्षेत्रीय पुलिस ड्यूटी मीट का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक तकनीक, साइबर अपराध जांच, फॉरेंसिक विज्ञान और डिजिटल साक्ष्य संग्रहण में दक्ष बनाना है। डीआईजी कौशल किशोर और एसपी कुमार गौरव ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 17 June 2026, 6:18 PM IST

Latehar: झारखंड पुलिस को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाने और अनुसंधान कार्यों को अधिक प्रभावी करने के उद्देश्य से लातेहार टाउन हॉल में तीन दिवसीय पलामू क्षेत्रीय पुलिस ड्यूटी मीट का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन पलामू क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) कौशल किशोर और लातेहार पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने संयुक्त रूप से किया।

तीन जिलों के पुलिसकर्मी हुए शामिल

इस क्षेत्रीय पुलिस ड्यूटी मीट में लातेहार, पलामू और गढ़वा जिले के पुलिस पदाधिकारी और जवान बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल को आधुनिक अनुसंधान तकनीकों और नई पुलिसिंग प्रणाली से परिचित कराना है, ताकि अपराधों की जांच और मामलों के निष्पादन में तेजी लाई जा सके।

साइबर अपराध और डिजिटल जांच पर विशेष फोकस

कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध जांच, फॉरेंसिक विज्ञान, डिजिटल साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया और आधुनिक अपराध अनुसंधान की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में अपराधी भी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए पुलिस बल का तकनीकी रूप से सक्षम होना जरूरी है।

बदलते अपराध के साथ बदल रही पुलिसिंग

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि अपराध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। पहले जहां पारंपरिक तरीकों से अपराध की जांच होती थी, वहीं अब डिजिटल साक्ष्य और वैज्ञानिक जांच की भूमिका काफी बढ़ गई है। ऐसे में पुलिस जवानों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण देना समय की जरूरत है।

प्रतियोगिताओं और तकनीकी सत्रों का आयोजन

तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में विभिन्न तकनीकी सत्र, प्रतियोगिताएं और अनुभव साझा करने के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें पुलिसकर्मी अपने अनुसंधान अनुभवों को साझा करेंगे और बेहतर जांच प्रक्रिया को लेकर चर्चा करेंगे।

अपराध नियंत्रण में मददगार साबित होगा प्रशिक्षण

अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। इससे न केवल अपराध अनुसंधान बेहतर होगा बल्कि अपराधियों तक पहुंचने और मामलों के जल्द निष्पादन में भी सहायता मिलेगी।

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डिजिटल अपराधों के दौर में पुलिस प्रशिक्षण क्यों जरूरी?

आज अपराध केवल हथियार या पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रह गया है। साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डिजिटल पहचान की चोरी और तकनीकी माध्यमों से किए जाने वाले अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में पुलिस की जांच क्षमता को आधुनिक तकनीक से जोड़ना जरूरी हो गया है। क्षेत्रीय स्तर पर इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम छोटे जिलों की पुलिस को भी बड़े अपराधों की जांच में सक्षम बना सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर अपराध नियंत्रण के साथ-साथ न्याय प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।

Location :  Latehar

Published :  17 June 2026, 6:18 PM IST