3 करोड़ दो और मंत्री बन जाओ… प्रियंका गांधी के सेक्रेटरी बनकर केरल के नेताओं को ठगने की कोशिश

प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव डी.एस. राजकुमार के नाम का गलत इस्तेमाल कर कई जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर ठगी की कोशिश का मामला सामने आया है। मामले में साइबर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 July 2026, 5:50 PM IST

New Delhi: प्रियंका गांधी वाड्रा के पर्सनल सेक्रेटरी डी.एस. राजकुमार ने राज्य पुलिस प्रमुख और वायनाड के पुलिस अधीक्षक (SP) के पास शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने नई दिल्ली में रहने वाले राजकुमार की पहचान का गलत इस्तेमाल किया। उसने खुद को उनका परिचित बताकर कई चुने हुए प्रतिनिधियों से संपर्क किया और उन्हें ठगने का प्रयास किया।

किन नेताओं को निशाना बनाया गया?

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कांग्रेस विधायक के. विद्या बालकृष्णन (एलाथुर) और सांसद शफी परमबिल और डीन कुरियाकोस से संपर्क किया। राजकुमार का आरोप है कि आरोपी ने उनकी पहचान और सांसदों के कार्यालयों के नाम का इस्तेमाल करके चुने हुए प्रतिनिधियों से पैसे ऐंठने और धोखाधड़ी करने की कोशिश की।

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पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

वायनाड साइबर पुलिस ने धोखाधड़ी और किसी और की पहचान का गलत इस्तेमाल करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है। इससे पहले, कोझिकोड साइबर पुलिस ने भी कांग्रेस विधायक विद्या बालकृष्णन की शिकायत के आधार पर इसी मामले में केस दर्ज किया था। पुलिस के अनुसार, विधायक विद्या बालकृष्णन को 6 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजे एक व्हाट्सएप कॉल आया। कॉलर ने खुद को नई दिल्ली में प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से डी.एस. राजकुमार बताया।

मंत्री पद के लिए कितने पैसे मांगे गए?

कॉलर ने दावा किया कि केरल कैबिनेट में फेरबदल होने वाला है और अगर वह ₹3 करोड़ देते हैं तो उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। पुलिस के अनुसार, बातचीत अंग्रेजी में हुई और लगभग 10 मिनट तक चली। बातचीत के दौरान ही विधायक को कॉलर के दावों पर शक होने लगा। कॉलर ने यह भी दावा किया कि कोझिकोड के एक अन्य सांसद ने मंत्री पद के लिए विद्या बालकृष्णन के नाम की सिफारिश की थी।

धोखाधड़ी की पुष्टि कैसे हुई?

पुलिस के अनुसार, कॉल खत्म होने के बाद विधायक ने संबंधित सांसद से संपर्क किया। सांसद ने बताया कि AICC कार्यालय का प्रतिनिधि होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने उनसे और एक अन्य विधायक का संपर्क नंबर मांगा था। इसके बाद, बालकृष्णन ने सीधे प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से संपर्क किया, जहां यह स्पष्ट किया गया कि ऐसा कोई कॉल नहीं किया गया था और यह घटना पूरी तरह से धोखाधड़ी की कोशिश थी।

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दर्ज किया गया मामला

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, कॉल नई दिल्ली से आई थी और इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर के आधार पर एक संदिग्ध की पहचान की गई है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अभी यह पता लगाना बाकी है कि इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड नकली पहचान दस्तावेजों का उपयोग करके लिया गया था या नहीं। अधिकारियों ने बताया कि जांच के सिलसिले में पुलिस की एक टीम जल्द ही नई दिल्ली जाएगी।

Location :  New Delhi

Published :  16 July 2026, 5:50 PM IST