कपसाड़ हत्याकांड में आरोपी पारस सोम की एक फोन कॉल ने उसकी फरारी पर ब्रेक लगा दिया। रुड़की रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने घेराबंदी कर युवती को सुरक्षित बरामद कर लिया। हालांकि अन्य नामजद आरोपियों की भूमिका अब भी जांच के घेरे में है।

कपसाड़ हत्याकांड
Meerut: “मैं बाहर निकल रहा हूं…” यह एक छोटी-सी फोन कॉल कपसाड़ हत्याकांड की दिशा बदलने वाली साबित हुई। जैसे ही मुख्य आरोपी पारस सोम ने अपने एक दोस्त को फोन कर यह बात कही, पुलिस की सर्विलांस टीम अलर्ट हो गई। पारस का मोबाइल पहले से सर्विलांस पर था। कॉल सुने जाने के तुरंत बाद मेरठ पुलिस ने हरिद्वार पुलिस से संपर्क साधा और रुड़की में घेराबंदी की रणनीति तैयार कर ली।
पुलिस को अंदेशा था कि पारस युवती रूबी को लेकर ट्रेन के जरिए किसी दूसरे राज्य की ओर भाग सकता है। इसी सूचना पर एसएसपी हरिद्वार ने तत्काल एसपी देहात को रुड़की रेलवे स्टेशन भेजा। मेरठ पुलिस की टीमें भी रवाना हो गईं, लेकिन उनसे पहले हरिद्वार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्टेशन पर ही युवती को सुरक्षित बरामद कर लिया और आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया।
घटना को अंजाम देने के बाद पारस सोम युवती रूबी को लेकर सहारनपुर जिले के नागल गांव में अपने एक रिश्तेदार के घर पहुंच गया था। यहीं पर उसने दो दिन तक फरारी काटी। सहारनपुर पुलिस को इनपुट मिला था कि युवक-युवती नागल में रुके हुए हैं और शनिवार को किसी दूसरी जगह रवाना होने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले कि पुलिस वहां पहुंचती, दोनों रुड़की रेलवे स्टेशन पहुंच गए।
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रुड़की रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद पारस सोम ने अपने दोस्त को फोन कर बताया कि वह “बाहर निकल रहा है।” यही कॉल पुलिस के लिए निर्णायक साबित हुई। सर्विलांस टीम ने जैसे ही बातचीत सुनी, मेरठ पुलिस ने हरिद्वार के एसएसपी को अलर्ट किया। इसके बाद स्टेशन पर चारों तरफ से घेराबंदी कर दी गई।
पुलिस की घेराबंदी इतनी सटीक थी कि ट्रेन में सवार होने से पहले ही पुलिस ने युवती रूबी को तलाश लिया और आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मेरठ से एसपी सिटी की टीम भी रुड़की पहुंची। देर रात करीब 10:30 बजे आरोपी और युवती को मेरठ लाया गया।
सरधना के कपसाड़ गांव में सुनीता की हत्या और बेटी रूबी के अपहरण के बाद हालात बेहद संवेदनशील बने हुए थे। शनिवार को एडीजी भानु भास्कर, डीआईजी कलानिधि नैथानी और एसएसपी सलावा चौकी पर डटे रहे। तीनों अधिकारी पल-पल की जानकारी लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय को देते रहे। अधिकारियों ने सभी प्वाइंट्स का निरीक्षण किया और पुलिसकर्मियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को गांव के भीतर प्रवेश न करने दिया जाए। दिनभर गांव में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
इस सनसनीखेज मामले में दर्ज एफआईआर में पारस सोम के अलावा सुनील राजपूत और दो अज्ञात युवकों को भी नामजद किया गया है। हालांकि पारस की गिरफ्तारी के बाद भी अन्य आरोपियों का सुराग न लग पाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि युवती के अपहरण और मां सुनीता की हत्या की साजिश में चारों युवक शामिल थे। इसके बावजूद घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो सुनील राजपूत को गिरफ्तार कर सकी है और न ही दो अज्ञात युवकों की पहचान कर पाई है।
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पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आ रहा है कि घटना के समय मौके पर मुख्य आरोपी पारस सोम और युवती रूबी ही मौजूद थे। ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि एफआईआर में नामजद सुनील और दो अज्ञात युवकों की वास्तविक भूमिका क्या थी। क्या वे साजिशकर्ता थे या घटना से पहले अथवा बाद में उनकी कोई भूमिका रही। इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बृहस्पतिवार सुबह सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव निवासी सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। रजबहे की पटरी के पास पारस सोम, सुनील और उनके साथी कार लेकर पहुंचे और रूबी को अगवा करने का प्रयास किया। मां ने विरोध किया तो सुनीता पर फरसे से हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल सुनीता की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।
घटना के बाद शनिवार सुबह जिले की सभी सीमाएं सील कर दी गईं। काशी टोल प्लाजा पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन और विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने रोक लिया, जिस पर धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। शाम को नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद, कांग्रेस नेताओं और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी बॉर्डर पर रोक दिया गया, जिसके चलते धरना-प्रदर्शन हुआ।