Hamirpur News: लोन की KYC के नाम पर खेला बड़ा खेल! लोगों के नाम पर निकलवाए 105 SIM, 35 राज्यों में साइबर फ्रॉड से कनेक्शन

हमीरपुर में साइबर क्राइम पुलिस ने कूटरचित ई-केवाईसी के जरिए सिम कार्ड सक्रिय कर साइबर अपराधियों को बेचने वाले कथित गिरोह का खुलासा किया है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 48 ब्लैंक सिम, दो मोबाइल और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस जांच में 105 सिम से जुड़े कई राज्यों के साइबर फ्रॉड सामने आए हैं।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 1 September 2026, 3:58 PM IST

Hamirpur: साइबर ठगों तक पहुंचने वाला रास्ता सिर्फ फर्जी लिंक, फर्जी कॉल या फर्जी वेबसाइट से नहीं गुजरता। कई बार किसी आम आदमी की पहचान और KYC का इस्तेमाल करके उसके नाम पर ऐसा सिम कार्ड निकाल दिया जाता है, जिसकी उसे भनक तक नहीं होती। हमीरपुर में साइबर क्राइम पुलिस ने ऐसे ही एक कथित SIM Farming गिरोह का खुलासा किया है, जिसने लोगों की जानकारी और सहमति के बिना उनके नाम पर सिम सक्रिय कर उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप है।

पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 48 ब्लैंक सिम कार्ड, दो एंड्रॉइड मोबाइल फोन और दो आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों की ओर से सक्रिय किए गए कुल 105 सिम कार्ड अलग-अलग राज्यों में हुए साइबर अपराधों से जुड़े मिले हैं। पुलिस अब इन नंबरों के जरिए हुए कथित साइबर फ्रॉड की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

दो शिकायतों से खुलने लगा SIM Farming का राज

मामले की शुरुआत साइबर फ्रॉड की दो शिकायतों से हुई। पुलिस के मुताबिक 21 अगस्त 2026 को सुमेरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भौनिया, चन्दपुरवा निवासी एक महिला ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी थी। शिकायत के आधार पर अज्ञात के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके कुछ दिन बाद 25 अगस्त 2026 को सिसोलर थाना क्षेत्र के ग्राम भुलसी निवासी एक अन्य महिला की शिकायत पर भी धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।

दो आरोपियों के नाम आए सामने

पुलिस अधीक्षक हमीरपुर के निर्देश पर दोनों मामलों के खुलासे के लिए अलग-अलग टीमें गठित की गईं। जांच आगे बढ़ी तो दीपक कुमार पुत्र रामखिलावन, निवासी ग्राम भौरा डाण्डा, थाना सुमेरपुर और विक्रान्त सिंह पुत्र बलवान सिंह, निवासी ग्राम देवपुरा, थाना कालपी, जनपद जालौन के नाम सामने आए। पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में थे और सिम कार्ड सक्रिय कराने के काम में शामिल थे।

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माइक्रोफाइनेंस लोन के नाम पर KYC का इस्तेमाल

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी POS एजेंट के तौर पर काम करते थे। पुलिस के अनुसार विक्रान्त सिंह एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी में फील्ड ऑफिसर के रूप में कार्यरत था और दीपक कुमार उसका सहयोगी था। आरोप है कि दोनों समूह लोन दिलाने और KYC प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर लोगों से उनकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते थे। इसी दौरान कथित तौर पर लोगों की जानकारी या सहमति के बिना उनके नाम से सिम कार्ड सक्रिय करा लिए जाते थे।

105 सिम कार्डों से जुड़े कई राज्यों के मामले

पुलिस ने जब आरोपियों से जुड़े सिम कार्डों की जानकारी को NCRP और समन्वय पोर्टल पर जांचा तो मामला और बड़ा होता चला गया। पुलिस के अनुसार आरोपी दीपक कुमार द्वारा निकाले गए 69 सिम कार्ड ऐसे साइबर अपराधों से जुड़े पाए गए, जिनमें 19 राज्यों में 114 साइबर फ्रॉड की घटनाएं सामने आई हैं। इसी तरह विक्रान्त सिंह द्वारा निकाले गए 36 सिम कार्ड से जुड़े मामलों में 16 राज्यों में 56 साइबर फ्रॉड की घटनाएं दर्ज पाई गई हैं।

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48 ब्लैंक SIM और मोबाइल बरामद

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 48 ब्लैंक सिम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा दो एंड्रॉइड मोबाइल फोन और दो आधार कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं। अब पुलिस बरामद मोबाइल फोन और सिम कार्ड की तकनीकी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन नंबरों का इस्तेमाल किन लोगों ने किया, इनसे किन मोबाइल डिवाइस पर संपर्क हुआ और साइबर अपराधों में इनकी वास्तविक भूमिका क्या थी।

कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की पड़ताल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों आरोपी सिर्फ सिम उपलब्ध कराने तक सीमित थे या इनके पीछे साइबर अपराधियों का कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था। क्योंकि 105 सिम कार्डों का कई राज्यों में साइबर फ्रॉड से जुड़ना जांच को दूसरे स्तर तक ले जाता है। पुलिस अब कथित तौर पर उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्हें ये सिम कार्ड बेचे गए थे।

Location :  Hamirpur

Published :  1 September 2026, 3:58 PM IST