सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के इन 2 अस्पतालों से कहा- आप डॉक्टर कहलाने के लायक नहीं, CJI सूर्यकांत हुए नाराज…

गाजियाबाद में 4 साल की बच्ची को इलाज न देने वाले दो निजी अस्पतालों को कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदारी न निभाने वालों को डॉक्टर कहलाने का हक नहीं है और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का निर्देश दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 July 2026, 6:09 PM IST

Ghaziabad: गाजियाबाद में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने बच्ची का इलाज करने से इनकार करने वाले दो निजी अस्पतालों और उनके डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर वे अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सकते तो उन्हें डॉक्टर कहलाने का अधिकार नहीं है। अदालत ने दोनों अस्पतालों (खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर और सेंट जोसेफ (मरियम) अस्पताल) को पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

इलाज नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान अस्पतालों के रवैये पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि यदि अस्पताल में इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं थी तो बच्ची को तत्काल किसी दूसरे अस्पताल भेजा जाना चाहिए था। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ इसलिए इलाज नहीं किया गया क्योंकि पीड़ित परिवार गरीब था और अस्पताल की फीस देने में सक्षम नहीं था। अदालत ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा सेवा से इनकार करना बेहद गंभीर मामला है।

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पीड़ित परिवार ने सीबीआई या एसआईटी जांच की मांग की

पीड़िता के पिता, जो दिहाड़ी मजदूर हैं, ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पूरे मामले की जांच अदालत की निगरानी में एसआईटी या सीबीआई से कराने की मांग की है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि पीड़िता और उसके परिवार की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए और उन्हें किसी भी तरह से परेशान न किया जाए।

घटना के बाद इलाज के लिए भटकता रहा परिवार

यह मामला 16 मार्च 26 का है। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला युवक चॉकलेट दिलाने के बहाने चार वर्षीय बच्ची को अपने साथ ले गया था। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की और बाद में बच्ची गंभीर हालत में खून से लथपथ मिली। परिजन उसे पहले दो निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि दोनों अस्पतालों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। इसके बाद बच्ची को सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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पुलिस की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में

सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुका है। अदालत ने कहा था कि एफआईआर दर्ज करने और जांच शुरू करने में अनावश्यक देरी की गई। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस ने मदद करने के बजाय परिवार पर चुप रहने का दबाव बनाया। शुरुआती एफआईआर में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी शामिल नहीं की गई थीं। फिलहाल मामले की जांच तीन वरिष्ठ महिला अधिकारियों वाली एसआईटी कर रही है। आरोपी गौरव प्रजापति को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और बाद में पुलिस मुठभेड़ में उसके पैरों में गोली लगी थी। अब पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सुनवाई जारी है।

Location :  Ghaziabad

Published :  17 July 2026, 6:09 PM IST