
16 साल तक दूसरे के प्रमाण पत्र पर नौकरी (Img: AI Generated Image)
Deoria: जिले के लार थाना क्षेत्र से शिक्षा विभाग को हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बरडीहा दलपत गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक शिक्षिका पर आरोप है कि उन्होंने किसी दूसरी महिला के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का कथित तौर पर इस्तेमाल कर करीब 16 वर्षों तक सरकारी नौकरी की। विभागीय जांच में मामला सामने आने के बाद अब पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले में खंड शिक्षा अधिकारी रामप्यारे, सलेमपुर की ओर से करीब 33 पन्नों की जांच पत्रावली पुलिस को सौंपी गई। इसी के आधार पर लार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जीवाड़े की शुरुआत कैसे हुई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
मामला बरडीहा दलपत गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका गरिमा सिंह पत्नी अनिल कुमार सिंह से जुड़ा है। विभागीय जांच के मुताबिक, वर्ष 2010 में नियुक्ति के दौरान कथित तौर पर दूसरी गरिमा सिंह के शैक्षणिक अभिलेखों का इस्तेमाल किया गया।
जांच में सामने आए रिकॉर्ड के अनुसार, हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, बीएससी और बीएड समेत कई शैक्षणिक प्रमाण पत्र नियुक्ति के समय लगाए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 27 जुलाई 2010 को सलेमपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय बरसाथ में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति हुई थी। इसके बाद वर्ष 2014 में शिक्षिका की पदोन्नति हुई और वह उच्च प्राथमिक विद्यालय बरडीहा दलपत में कार्यभार ग्रहण कर गईं। यानी नियुक्ति के बाद भी कई वर्षों तक मामला विभागीय स्तर पर सामने नहीं आया।
जांच में जिन शैक्षणिक अभिलेखों के इस्तेमाल की बात सामने आई है, वे कथित तौर पर बस्ती जनपद के संसारपुर निवासी वास्तविक गरिमा सिंह पुत्री भारत सिंह के बताए गए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, वह वर्तमान में अयोध्या जनपद के मसौधा स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय हासापुर में कार्यरत हैं।
विभाग ने दोनों से जुड़े शैक्षणिक रिकॉर्ड और नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की। जांच के दौरान नियुक्ति में कथित अनियमितताओं के बिंदु सामने आए, जिसके बाद विभाग ने पुलिस कार्रवाई की ओर कदम बढ़ाया।
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर नियुक्ति के दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी थी तो करीब 16 वर्षों तक यह मामला पकड़ में कैसे नहीं आया? क्या नियुक्ति के समय प्रमाण पत्रों का ठीक से सत्यापन नहीं हुआ? पदोन्नति के दौरान भी दस्तावेजों की जांच किस तरह हुई? इतने लंबे समय तक जिम्मेदार अधिकारियों की नजर कथित अनियमितता पर क्यों नहीं पड़ी? फिलहाल इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।
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विभागीय जांच पूरी होने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी रामप्यारे, सलेमपुर ने 33 पन्नों की जांच पत्रावली पुलिस को सौंपी। इसके बाद लार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अब कथित फर्जी दस्तावेजों, उनके इस्तेमाल और सरकारी नौकरी हासिल करने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में शिक्षिका के अलावा किसी और की भूमिका थी या नहीं।
Location : Deoria
Published : 6 September 2026, 7:48 PM IST