‘गलती खनन विभाग की तो जुर्माना हम क्यों भरें?’ रॉयल्टी पर ठेकेदारों का अल्टीमेटम, 25 सितंबर से काम बंद

महराजगंज के फरेंदा में उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति की बैठक में रॉयल्टी सत्यापन और छह गुना तक जुर्माने के प्रावधान का विरोध किया गया। ठेकेदारों ने कहा कि सत्यापन खनन विभाग की जिम्मेदारी है, इसलिए गलती का जुर्माना उन पर नहीं लगाया जाना चाहिए। समिति ने भुगतान से रॉयल्टी काटकर खनन विभाग में जमा कराने की मांग की है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 4 September 2026, 4:28 PM IST

Maharajganj: रॉयल्टी के सत्यापन और छह गुना तक जुर्माने के प्रावधान को लेकर उत्तर प्रदेश के ठेकेदारों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है। महराजगंज के फरेंदा में हुई बैठक में ठेकेदारों ने दो टूक कहा कि उप खनिजों की रॉयल्टी से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन खनन विभाग की जिम्मेदारी है। अगर सत्यापन व्यवस्था में खामी है या दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आती है तो उसका खामियाजा ठेकेदारों को क्यों भुगतना पड़े? समिति ने मांग पूरी नहीं होने पर 25 सितंबर से प्रदेशभर में कार्य बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।

छह गुना जुर्माने को लेकर नाराजगी

फरेंदा डाक बंगले पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति, जनपद महराजगंज की बैठक हुई। बैठक में गिट्टी, मोरंग और अन्य उप खनिजों की रॉयल्टी, संबंधित प्रपत्रों के सत्यापन और सत्यापन में कमी पाए जाने पर होने वाली कार्रवाई को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष प्रभाकर उपाध्याय ने कहा कि लोक निर्माण विभाग में काम करने वाले ठेकेदारों को निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले उप खनिजों की रॉयल्टी से जुड़े प्रपत्र जमा करने पड़ते हैं। विभागीय जांच में अगर इन दस्तावेजों में कोई कमी या गलती पाई जाती है तो ठेकेदार पर छह गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

आठ-नौ जिलों से आता है निर्माण सामग्री का खनिज

प्रभाकर उपाध्याय ने कहा कि महराजगंज में होने वाले निर्माण कार्यों के लिए गिट्टी, मोरंग समेत अन्य उप खनिज कई बार आठ-नौ जिलों या उससे भी अधिक दूरी से मंगाए जाते हैं। ऐसे में खनिज वास्तव में कहां से आया, उसकी रॉयल्टी वैध है या नहीं और संबंधित दस्तावेज सही हैं या नहीं, इसका प्रभावी सत्यापन खनन विभाग को करना चाहिए।

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‘चार साल से कर रहे हैं पत्राचार, समस्या जस की तस’

समिति अध्यक्ष ने कहा कि इस समस्या को लेकर पिछले करीब चार वर्षों से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से लेकर प्रमुख अभियंता स्तर के अधिकारियों और प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग तक मामले को उठाया जा चुका है। इसके बावजूद ठेकेदारों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका सवाल है कि जब रॉयल्टी के सत्यापन की व्यवस्था विभागीय स्तर पर होनी है तो उसकी कमी का आर्थिक बोझ ठेकेदारों पर क्यों डाला जाए।

भुगतान से रॉयल्टी काटने की मांग

समिति ने प्रस्ताव रखा कि निर्माण कार्य के भुगतान के समय ही संबंधित रॉयल्टी की राशि काटकर उसे खनन विभाग में जमा कराने की व्यवस्था बनाई जाए। ठेकेदारों का मानना है कि इससे रॉयल्टी को लेकर होने वाले विवाद काफी हद तक खत्म हो सकते हैं। इसके साथ ही दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी भी विभागीय स्तर पर स्पष्ट हो जाएगी। ठेकेदारों का कहना है कि अगर सरकार एक पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था तैयार कर दे, जिसमें खनिज के स्रोत से लेकर रॉयल्टी तक का रिकॉर्ड आसानी से सत्यापित हो सके, तो बार-बार होने वाली कार्रवाई और विवाद को रोका जा सकता है।

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25 सितंबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी

बैठक में ठेकेदारों ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया। समिति ने चेतावनी दी कि यदि रॉयल्टी सत्यापन और छह गुना जुर्माने से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो 25 सितंबर से प्रदेशभर में कार्य बहिष्कार किया जाएगा। समिति ने जरूरत पड़ने पर न्यायालय की शरण लेने की बात भी कही है। ऐसे में अगर सरकार और विभाग की ओर से जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो प्रदेश में लोक निर्माण विभाग से जुड़े निर्माण कार्यों पर इसका असर पड़ सकता है।

बैठक में संजय प्रकाश सिंह, सुनील राय, सिद्धार्थ पांडेय, हरिनंदन उपाध्याय, सैयद महबूब आलम, प्रमोद सिंह, राकेश गुप्ता, मनीष सिंह, अभय सिंह, अमित तिवारी, अजय यादव, आशुतोष मिश्रा, रिंकू सिंह, प्रदीप नायक, हरिकेश कसौधन, विजय पांडेय और रजनीकांत पाठक समेत बड़ी संख्या में ठेकेदार मौजूद रहे।

Location :  Maharajganj

Published :  4 September 2026, 4:28 PM IST