आंगनबाड़ी भर्ती में आय प्रमाण पत्र का बड़ा फर्जीवाड़ा: एक नाम, दो प्रमाण पत्र, अलग-अलग आय! दस्तावेजों पर उठे सवाल

बदायूं की आंगनबाड़ी भर्ती में आय प्रमाण पत्र को लेकर सामने आए एक मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही अभ्यर्थी के नाम से तीन दिन के अंतर पर दो प्रमाण पत्र जारी होने का दावा है, जिनमें आय में 20 हजार रुपये का अंतर बताया गया है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 4 September 2026, 8:31 PM IST

Budaun: बदायूं जिले में चल रही आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। तहसील स्तर से जारी होने वाले आय प्रमाण पत्रों में हेराफेरी कर पात्रता हासिल करने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पूरा मामला जगत ब्लॉक के गांव नैथू से जुड़ा है, जिसने पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता अविष्कार शाक्य निवासी नैथू, जगत ने उप जिलाधिकारी, बदायूं को लिखित शिकायती पत्र देकर मामले का खुलासा किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गांव के ही एक अभ्यर्थी अम्मन खां के नाम से तहसील से दो अलग-अलग वार्षिक आय दर्शाते हुए दो आय प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

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तीन दिन में 20 हजार घट गई आय

शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार पहला आय प्रमाण पत्र आवेदन संख्या 251490010178158 के आधार पर 5 दिसंबर 2025 को जारी किया गया, जिसमें अभ्यर्थी की वार्षिक आय 66,000 रुपये दर्शाई गई है। हैरानी की बात यह है कि ठीक तीन दिन बाद 8 दिसंबर 2025 को उसी अभ्यर्थी के नाम से आवेदन संख्या 251490010180102 पर दूसरा आय प्रमाण पत्र जारी हो गया, जिसमें वार्षिक आय घटाकर 46,000 रुपये कर दी गई। यानी महज 72 घंटों के अंदर आय में 20,000 रुपये का अंतर दिखा दिया गया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि आंगनबाड़ी भर्ती में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को लाभ मिलने के चलते जानबूझकर आय कम दर्शाने के लिए दूसरा प्रमाण पत्र बनवाया गया है, ताकि चयन प्रक्रिया में अनुचित लाभ लिया जा सके।

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लेखपाल पर मेहरबानी क्यों?

मामले की शिकायत उप जिलाधिकारी कार्यालय में पहुंचने के बाद तहसील स्तर से जांच शुरू होने की बात कही जा रही है। लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। दोनों प्रमाण पत्रों को जारी करने वाले संबंधित लेखपाल पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि बिना स्थलीय सत्यापन के एक ही व्यक्ति की आय तीन दिन में कैसे बदल गई और तहसील के सिस्टम ने इसे जारी कैसे कर दिया।

शिकायतकर्ता अविष्कार शाक्य ने मांग की है कि दोनों आय प्रमाण पत्रों की गहनता से जांच कराई जाए, फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर यदि भर्ती में आवेदन किया गया है तो उसे निरस्त किया जाए और दोषी लेखपाल व संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।

Location :  Budaun

Published :  4 September 2026, 8:31 PM IST