राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा! जेल में आरोपियों ने खोले ऐसे राज, बढ़ीं कई बड़े नामों की मुश्किलें

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में जेल के भीतर हुई पूछताछ ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपियों के दावों से जांच का दायरा और बढ़ सकता है। वहीं, ट्रस्ट के भीतर से आई सफाई और नए खुलासों ने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चाओं में ला दिया है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 6 July 2026, 9:54 AM IST

Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। रविवार को पुलिस टीम ने कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद जेल में बंद पांच आरोपियों से पूछताछ की। इनमें टिन्नू, अनुकल्प, लवकुश, मनीष और रमाशंकर शामिल रहे। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई ऐसे दावे किए, जिनसे जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

आरोपियों का दावा- पहले भी हुई थी शिकायत

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कुछ महीने पहले ही दान की राशि में गड़बड़ी होने की शिकायत सामने आई थी। उनका दावा है कि उस समय उन्हें पकड़े जाने का डर था, लेकिन कथित तौर पर ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनका बचाव किया। आरोपियों का यह भी कहना है कि इसके बाद वे दोबारा कथित हेराफेरी करते रहे और किसी ने उनकी तलाशी या पूछताछ नहीं की।

अनिल मिश्रा पर फिर लगाए आरोप

पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी टिन्नू ने एक बार फिर डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए। उसने दावा किया कि चढ़ावे की राशि की गणना और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया में उनकी अहम जिम्मेदारी थी। हालांकि, यह आरोपी के दावे हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों ने नहीं की है। वहीं, उसने चंपत राय के बचाव में भी बयान दिया।

सोने की रामचरितमानस सुरक्षित होने का दावा

मामले के बीच ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व आईएएस लक्ष्मीनारायण द्वारा भेंट की गई स्वर्णयुक्त रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है। ट्रस्ट के अनुसार, यह प्रति दानदाता की इच्छा के अनुरूप पहले श्रीरामलला के गर्भगृह के सामने रखी गई थी और वर्तमान में आभूषण कोठरी में सुरक्षित संरक्षित है।

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बैंक की लापरवाही भी जांच के घेरे में

जांच में यह बात भी सामने आई है कि चढ़ावे की भारी राशि जमा कराने के दौरान बैंक स्तर पर भी व्यवस्थागत लापरवाही हुई। बताया जा रहा है कि कई बार संबंधित शाखा में नकदी रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण रकम को दूसरी शाखाओं में भेजना पड़ता था। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।

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ट्रस्ट के भीतर भी उठने लगे सवाल

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बयान जारी कर कहा कि उनका नकदी की गणना और बैंकिंग प्रक्रिया से कोई सीधा संबंध नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अधिकांश समय पुणे में रहते हैं और वित्तीय प्रक्रिया निर्धारित एसओपी के अनुसार संचालित होती थी। उनके इस बयान को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वहीं, कुछ राजनीतिक कनेक्शन की भी चर्चा है, लेकिन इसकी अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

Location :  Ayodhya

Published :  6 July 2026, 9:54 AM IST