Ram Mandir ‘Chanda Chori’: कौन हैं चंपत राय, क्यों दिया ट्रस्ट से इस्तीफा? पद छोड़ने के बाद भी उठ रहे कई सवाल

राम मंदिर ट्रस्ट से दो बड़े इस्तीफों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। एफआईआर, एसआईटी रिपोर्ट और लगातार बढ़ती जांच के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर चंपत राय कौन हैं और उनका नाम अचानक इतनी चर्चा में क्यों है?

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 26 June 2026, 2:26 PM IST

Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया है। यह ऐसे समय हुआ है जब एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के कुछ ही दिनों बाद मामले में एफआईआर दर्ज हुई और आठ लोगों को आरोपी बनाया गया।

सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने अपना इस्तीफा ट्रस्ट को सौंप दिया है। माना जा रहा है कि आने वाली ट्रस्ट बैठक में इन इस्तीफों पर चर्चा होगी और अंतिम फैसला ट्रस्ट की ओर से ही लिया जाएगा। चूंकि ट्रस्ट एक स्वायत्त संस्था है, इसलिए नियुक्ति और इस्तीफे से जुड़े निर्णय भी ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

कौन हैं चंपत राय?

चंपत राय उन प्रमुख चेहरों में शामिल हैं, जिन्होंने दशकों तक राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़कर संगठनात्मक भूमिका निभाई। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर स्थित आरएसएम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर के रूप में की थी। शिक्षण के दौरान ही उनका झुकाव सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों की ओर बढ़ा और बाद में उन्होंने पूरी तरह सार्वजनिक जीवन को अपना लिया।

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इमरजेंसी के दौर ने बदल दी जिंदगी

साल 1975 में देश में लगी इमरजेंसी के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े होने के कारण चंपत राय को गिरफ्तार किया गया था। बताया जाता है कि उन्हें कॉलेज से ही हिरासत में लिया गया और करीब 18 महीने जेल में रहना पड़ा। इसी दौर ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने शिक्षण कार्य छोड़ दिया और पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में संगठन से जुड़ गए।

विश्व हिंदू परिषद में बढ़ता गया कद

चंपत राय ने विश्व हिंदू परिषद में लंबे समय तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे केंद्रीय सचिव, संयुक्त महासचिव, अंतरराष्ट्रीय महासचिव और बाद में संगठन के उपाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर रहे। संगठन चलाने का उनका अनुभव और प्रशासनिक क्षमता उन्हें परिषद के प्रभावशाली नेताओं में शामिल करती रही।

राम जन्मभूमि आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान चंपत राय ने सिर्फ संगठनात्मक जिम्मेदारियां ही नहीं संभालीं, बल्कि कानूनी लड़ाई में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। मंदिर विवाद से जुड़े दस्तावेज, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को व्यवस्थित करने में उनकी बड़ी भूमिका बताई जाती है। वे लंबे समय तक विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल के करीबी सहयोगी भी रहे और आंदोलन के कई अभियानों का हिस्सा बने।

राम मंदिर ट्रस्ट में कैसे मिली जिम्मेदारी?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। 15 सदस्यीय इस ट्रस्ट को मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई। चंपत राय को ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया क्योंकि वे वर्षों से इस पूरे आंदोलन से जुड़े रहे थे और संगठनात्मक अनुभव भी रखते थे। ट्रस्ट के रोजमर्रा के प्रशासन, बैठकों के समन्वय, दान व्यवस्था, आधिकारिक संवाद और विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन्हीं के पास थी। इसी वजह से राम मंदिर से जुड़ी अधिकांश बड़ी घोषणाओं में वे ट्रस्ट का प्रमुख चेहरा बनकर सामने आते रहे।

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर एसआईटी जांच चल रही है। शुरुआती जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद इस मामले ने नया मोड़ ले लिया। इसके बाद पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। आरोपियों में चंपत राय के करीबी और उनके ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम भी शामिल है। इसके अलावा सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और रमाशंकर मिश्र को भी आरोपी बनाया गया है।

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हालांकि अब तक सार्वजनिक रूप से जारी जानकारी में चंपत राय या अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बताया गया है।

अब आगे क्या होगा?

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट की अगली बैठक में दोनों इस्तीफों पर विचार किया जाएगा। यदि ट्रस्ट इन्हें स्वीकार करता है तो नए पदाधिकारियों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। दूसरी ओर पुलिस जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। जांच एजेंसियां दान व्यवस्था, रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की भी गहराई से जांच कर रही हैं।

SIT रिपोर्ट के बाद क्यों बढ़ी हलचल?

एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल पैदा कर दी है। विपक्ष लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि हर पहलू की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है। एफआईआर दर्ज होने और आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे ने इस मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में ट्रस्ट का फैसला, एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और पुलिस जांच इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

Location :  Ayodhya

Published :  26 June 2026, 2:26 PM IST