“अदालत के कीमती समय की बर्बादी बर्दाश्त नहीं!” एक ही मुद्दे पर बार-बार जनहित याचिका डालने पर होगी बड़ी कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ही मुद्दे पर बार-बार जनहित याचिका दाखिल करने को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना है। मऊ निवासी की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 30 July 2026, 7:31 PM IST

Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ही मुद्दे पर बार-बार जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना है। कोर्ट ने मऊ निवासी की याचिका खारिज करते हुए उस पर 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाने की राशि चार सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करनी होगी। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने पारित किया।

ग्राम सभा के पुनर्गठन की मांग को लेकर दाखिल हुई थी PIL

मऊ निवासी अनिल चौहान ने जनहित याचिका दाखिल कर ग्राम सभा मिश्रौली से अलग कर बैरासी और मिश्रौली के नाम से नई ग्राम सभाओं के गठन की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने इसके लिए नया प्रत्यावेदन दिए जाने का हवाला दिया था।

इसी मुद्दे पर पहले भी दाखिल हो चुकी थी याचिका

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि इसी विषय को लेकर याचिकाकर्ता की ओर से पहले भी जनहित याचिका दाखिल की जा चुकी थी, जिसका निस्तारण हो चुका था। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ग्राम सभा के गठन या पुनर्गठन का अधिकार राज्य सरकार के पास है।

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कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी क्षेत्र की आबादी के आधार पर अलग ग्राम सभा बनाए जाने की मांग को लेकर व्यक्तिगत जनहित याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।

नए प्रत्यावेदन का हवाला कोर्ट ने नहीं माना

याचिकाकर्ता ने नई याचिका में नया प्रत्यावेदन दिए जाने को आधार बनाया था। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को निराधार बताते हुए कहा कि केवल नया प्रत्यावेदन देने से उसी मुद्दे पर दोबारा जनहित याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं मिल जाता।

पिछले आदेश का उल्लेख नहीं करने पर भी कोर्ट नाराज

खंडपीठ ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता ने अपनी नई याचिका में पहले पारित आदेश का उल्लेख तक नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी नए तथ्य या बदली हुई परिस्थिति के एक ही मुद्दे पर बार-बार जनहित याचिका दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल है।

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10 हजार हर्जाना जमा करने का आदेश

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपये का हर्जाना लगाया है। यह राशि चार सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करनी होगी। कोर्ट के इस आदेश को बार-बार एक ही विषय पर मुकदमेबाजी करने वालों के लिए महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

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Published :  30 July 2026, 7:31 PM IST