CSR के करोड़ों विदेश भेजने का ‘खेल’! फर्जी ट्रस्ट-शेल कंपनियों का खुलासा, 36 CA समेत 394 इकाइयां रडार पर

फर्जी कागजात, शेल कंपनियों और बोगस डोनेशन के जरिए कंपनियों के CSR फंड को विदेश भेजने के कथित नेटवर्क पर आयकर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। देशभर में संदिग्ध विदेशी प्रेषण की जांच के दौरान 394 इकाइयां और 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट जांच के दायरे में हैं। इनमें आगरा के ताजगंज क्षेत्र का एक CA भी शामिल है। मथुरा के एक ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुंबई स्थित ठिकानों पर भी आयकर विभाग की टीम सर्वे कर रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 August 2026, 12:52 PM IST

Agra: आगरा में फर्जी कागजात और शेल कंपनियों के सहारे करोड़ों-अरबों रुपये विदेश भेजने के कथित खेल की जांच ने अब नया मोड़ ले लिया है। कंपनियों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड और दूसरे भुगतान की आड़ में विदेशी खातों तक रकम पहुंचाने के मामले में आयकर विभाग ने देशभर में बड़ी कार्रवाई शुरू की है। संदिग्ध आउटवर्ड फॉरेन रेमिटेंस यानी विदेश भेजी गई रकम की जांच के दौरान विभाग के रडार पर 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत 394 संदिग्ध इकाइयां आई हैं।

तीन साल के आंकड़ों से खुला कथित नेटवर्क

आयकर विभाग ने पिछले तीन वर्षों के वित्तीय आंकड़ों का गहन विश्लेषण और खुफिया सूचनाओं के आधार पर इस कथित सिंडिकेट की जानकारी जुटाई। जांच के दौरान मथुरा में पंजीकृत एक ट्रस्ट और उससे जुड़े दो सीए समेत करीब आधा दर्जन ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी। विभागीय जांच में कथित तौर पर सामने आया कि फर्जी चैरिटेबल ट्रस्ट और बोगस डोनेशन के जरिए बड़ी रकम को इधर-उधर किया जा रहा था। इसके बाद इसी रकम को अलग-अलग माध्यमों से देश के बाहर भेजे जाने का आरोप है।

फर्जी ट्रस्ट और बोगस डोनेशन का कथित खेल

जांच के दौरान जिन फर्मों के बैंक खातों से विदेशी मुद्रा भेजे जाने की जानकारी सामने आई, उनमें से बड़ी संख्या ऐसी बताई जा रही है जिन्होंने आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था। कुछ कंपनियों ने अपने कारोबार का टर्नओवर बेहद कम दिखाया था। आयकर विभाग के संदेह का एक बड़ा कारण यही पैटर्न बना। कम कारोबार दिखाने वाली कंपनियों के खातों से बड़ी रकम का विदेश जाना जांच एजेंसी के लिए सवाल खड़े करने वाला था।

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394 संदिग्ध इकाइयां जांच के घेरे में

आयकर विभाग की कार्रवाई का दायरा सिर्फ आगरा या मथुरा तक सीमित नहीं है। देशभर में कुल 394 संदिग्ध इकाइयों की पहचान की गई है। इनमें सीमावर्ती राज्यों से जुड़ी 117 इकाइयां भी शामिल बताई गई हैं। इन इकाइयों के विदेशी लेन-देन, बैंक खातों, कंपनियों के पंजीकृत पते, आयकर रिटर्न और भुगतान के कारणों की जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि विदेशी मुद्रा भेजने के लिए जिन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया, वे वास्तविक थे या फर्जी।

फॉर्म 15CB जारी करने वाले CA की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका जांच का अहम हिस्सा बन गई है। नियमों के तहत विदेशी भुगतान से पहले CA को संबंधित खातों और लेन-देन की जांच कर आवश्यक प्रमाणपत्र जारी करना होता है। आयकर विभाग को संदेह है कि कुछ मामलों में पर्याप्त जांच-पड़ताल किए बिना प्रमाणपत्र जारी किए गए। यही वजह है कि अब इन प्रमाणपत्रों के आधार पर विदेश भेजी गई रकम और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

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मुंबई तक पहुंची जांच की आंच

मथुरा में पंजीकृत एक ट्रस्ट से जुड़े लोगों के मुंबई स्थित ठिकानों पर भी आयकर विभाग की टीम सर्वे कर रही है। इससे साफ है कि जांच का नेटवर्क कई शहरों तक फैला हुआ है। अधिकारी बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों, ट्रस्ट से जुड़े रिकॉर्ड और विदेशी लेन-देन की जानकारी जुटा रहे हैं। जांच के दौरान अगर किसी दस्तावेज में गड़बड़ी या किसी लेन-देन में संदिग्धता मिलती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

पेशेवरों को CBDT की सख्त चेतावनी

सीबीडीटी की प्रवक्ता और आयकर आयुक्त (मीडिया एवं तकनीकी नीति) वी. रजिथा ने पेशेवरों की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि फॉर्म 15CB/146 जारी करने वाले पेशेवरों को पूरी निष्ठा और पेशेवर सतर्कता के साथ काम करना होगा।

Location :  Agra

Published :  19 August 2026, 12:52 PM IST