लुढ़के सोना-चांदी के रेट, जानें गिरावट की बड़ी वजह; आखिर क्यों टूटे दाम?

MCX पर सोना करीब 1% और चांदी 3% तक गिरी। अमेरिकी CPI डेटा और डॉलर की मजबूती से कीमती धातुओं पर दबाव। जानें ताजा भाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर और क्या यह निवेश का सही मौका है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 16 February 2026, 9:48 AM IST

New Delhi: सप्ताह की शुरुआत में घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी दबाव में नजर आए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर करीब 1% गिरकर ₹1,54,743 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा। पिछले सत्र में लगभग 2% की तेज बढ़त के बाद मुनाफावसूली ने कीमतों को नीचे खींचा। वहीं मार्च सिल्वर फ्यूचर में करीब 3% की तेज गिरावट दर्ज हुई और भाव ₹2,36,915 प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गए।

अमेरिकी आंकड़ों और डॉलर की मजबूती का असर

कीमती धातुओं पर दबाव की बड़ी वजह अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और डॉलर इंडेक्स की हल्की मजबूती रही। यूएस लेबर डिपार्टमेंट के मुताबिक जनवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 0.2% बढ़ा, जो बाजार अनुमान 0.3% से कम रहा।

सामान्यतः नरम महंगाई दर ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ाती है, लेकिन डॉलर इंडेक्स करीब 0.10% चढ़कर 97 के आसपास पहुंचने से सोना-चांदी विदेशी निवेशकों के लिए महंगे हो गए। डॉलर मजबूत होने पर कमोडिटी कीमतों पर दबाव बढ़ता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए इनकी लागत बढ़ जाती है। यही वजह रही कि घरेलू बाजार में भी सोना-चांदी में कमजोरी दिखी।

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ब्याज दरों को लेकर बदली धारणा

फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक को लेकर निवेशक सतर्क हैं। मध्यम स्तर की महंगाई ने मार्च में संभावित रेट कट की उम्मीदों को थोड़ा कमजोर किया है। आम तौर पर ब्याज दरें घटने की संभावना सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे बॉन्ड यील्ड घटती है और नॉन-यील्डिंग एसेट के रूप में गोल्ड आकर्षक बनता है। लेकिन डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता के बीच फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव

स्पॉट सिल्वर अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 0.6% गिरकर 76.92 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। शुक्रवार को लगभग 3% की तेजी के बाद यह गिरावट आई है। वैश्विक निवेशक अमेरिकी डेटा और फेड की नीति संकेतों पर नजर रखे हुए हैं, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।

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क्या निवेश का सही समय?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकती है। पिछले साल की तेज रैली के बाद हालिया करेक्शन से कीमतें अपेक्षाकृत आकर्षक स्तर पर आई हैं। हालांकि निवेश से पहले वैश्विक आर्थिक संकेतकों, डॉलर की दिशा और फेड की ब्याज दर नीति पर नजर रखना जरूरी है।
लॉन्ग टर्म रणनीति अपनाने वाले निवेशक चरणबद्ध तरीके से निवेश बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं, ताकि जोखिम संतुलित रहे। फिलहाल बाजार में सतर्क आशावाद का माहौल है और आगे की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से तय होगी।

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  • 16 February 2026, 9:48 AM IST