वैश्विक तनाव के बीच आमतौर पर सोने-चांदी की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार MCX पर दोनों धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सोना 1.83% गिरकर 1,55,566 तक पहुंच गया, जबकि चांदी में 5000 रुपये तक की गिरावट दर्ज हुई। जानिए इसके पीछे कच्चे तेल, डॉलर और फेडरल रिजर्व की नीतियों का क्या असर है।

गोल्ड-सिल्वर रेट (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात में आमतौर पर सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। निवेशक इन्हें सुरक्षित निवेश यानी ‘सेफ हेवन’ एसेट के तौर पर खरीदते हैं। लेकिन इस बार बाजार में कुछ अलग ही तस्वीर देखने को मिली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशक हैरान रह गए।
सोमवार को सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम करीब 2690 से 2900 रुपये तक की गिरावट देखी गई। MCX पर सोना करीब 1.83 प्रतिशत गिरकर 1,55,566 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं चांदी में सोने से भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। चांदी की कीमत में प्रति किलो लगभग 4232 से 5000 रुपये तक की कमी आई और यह करीब 2.11 प्रतिशत गिरकर 2.53 से 2.55 लाख रुपये प्रति किलो के दायरे में ट्रेड करती दिखी।
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं। रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर लगभग 100.15 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, खेती और कच्चे माल की लागत बढ़ने से दुनिया भर में महंगाई का दबाव बनता है। ऐसी स्थिति में अमेरिका का केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है।
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जब फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा रखता है तो अमेरिकी डॉलर मजबूत हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना डॉलर में खरीदा-बेचा जाता है। ऐसे में डॉलर के मजबूत होने से सोना अन्य देशों के निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घट जाती है और कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है।
इसके अलावा जब कच्चे तेल की कीमत अचानक तेजी से बढ़ती है तो शेयर बाजार और कमोडिटी बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ जाती है। कई बार निवेशक अपने नुकसान की भरपाई या मार्जिन कॉल को पूरा करने के लिए सोना बेचकर नकदी जुटाते हैं। इससे भी सोने-चांदी की कीमतों पर दबाव बनता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसे उतार-चढ़ाव वाले समय में घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। कमोडिटी मार्केट में अल्पकालिक गिरावट सामान्य बात है। लंबे समय के निवेशकों के लिए यह खरीदारी का मौका भी हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक एक साथ पूरी राशि लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करें।
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उदाहरण के लिए अगर कोई निवेशक 1 लाख रुपये निवेश करना चाहता है, तो शुरुआत में केवल 25,000 रुपये लगाएं और कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे बाकी निवेश करें। विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस साल दिवाली तक सोने की कीमतें फिर से रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं। इसलिए निवेशकों को कच्चे तेल की कीमत, महंगाई के रुझान और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए।