अमेरिका-ईरान तनाव के बीच MCX पर सोने की कीमत ₹1,55,110 के पार पहुंची। चांदी में भी तेजी। मजबूत डॉलर ने बढ़त सीमित की। जानिए गोल्ड प्राइस, फेड रेट कट और डॉलर इंडेक्स का ताजा असर।

सोने में बढ़त (Img Source: google)
New Delhi: शुक्रवार सुबह घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखी गई। करीब 9:45 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 0.20% चढ़कर ₹1,55,110 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं मार्च डिलीवरी की चांदी 0.65% उछलकर ₹2,42,974 प्रति किलोग्राम पहुंच गई। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर मोड़ा है, जिससे कीमती धातुओं को समर्थन मिला।
हालांकि सोने में बढ़त रही, लेकिन डॉलर की मजबूती ने इस तेजी पर कुछ हद तक ब्रेक लगाया। डॉलर इंडेक्स 98 के स्तर के करीब पहुंच गया और लगातार चौथे सत्र में मजबूती दर्ज की। इस सप्ताह डॉलर में 1% से अधिक की बढ़त रही है और यह अक्टूबर की शुरुआत के बाद का सर्वश्रेष्ठ साप्ताहिक प्रदर्शन कर सकता है। मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर नरम रुख के संकेतों ने डॉलर को सहारा दिया है।
जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य मुद्राओं के मुकाबले सोना महंगा हो जाता है। इससे विदेशी खरीदारों की मांग प्रभावित होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदारी सुस्त पड़ सकती है। इसलिए डॉलर इंडेक्स में तेजी आमतौर पर सोने की कीमतों के लिए नकारात्मक मानी जाती है।
Gold Price: डॉलर की मजबूती से टूटी सोना-चांदी की चमक, यहां देखें ताजा रेट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा है और सप्ताहांत में संभावित सैन्य कदमों की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे हालात में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच गोल्ड प्राइस को सहारा मिल रहा है।
Gold Price: सोने में हल्की तेजी, डॉलर की चाल पर टिकी बाजार की नजर; जानें आज का ताजा गोल्ड प्राइस
बाजार की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve की अगली मौद्रिक नीति पर भी है। हाल ही में जारी साप्ताहिक बेरोजगारी दावों के आंकड़े पांच सप्ताह के निचले स्तर पर आए हैं, जो श्रम बाजार की मजबूती दिखाते हैं। CME Group के FedWatch टूल के मुताबिक जून बैठक में दर कटौती की संभावना करीब 50% आंकी जा रही है। जनवरी की FOMC बैठक के मिनट्स से भी संकेत मिला कि नीति निर्माताओं के बीच दरों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। अब निवेशक चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़े और PCE प्राइस इंडेक्स रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। ये आंकड़े तय करेंगे कि आगे फेड की नीति किस दिशा में जा सकती है।