US-ईरान तनाव के बीच MCX पर सोना ₹1.61 लाख के आसपास स्थिर है। डॉलर की मजबूती से तेजी सीमित रही। जानें क्या अभी सोना खरीदना सही है, एक्सपर्ट्स का आउटलुक और गोल्ड के अहम सपोर्ट-रेजिस्टेंस लेवल।

सोने की कीमतों में तेजी (Img Source: google)
New Delhi: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान युद्ध के बढ़ते तनाव के बावजूद सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को नहीं मिला है। भारतीय कमोडिटी बाजार में MCX Gold पिछले सप्ताह हल्की मजबूती के साथ लगभग ₹1,61,675 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। यह अपने ऑल-टाइम हाई ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम से करीब ₹19,000 नीचे है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX Gold की कीमत लगभग $5,158.70 प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुई, जो अपने रिकॉर्ड हाई $5,626.80 से लगभग $468 नीचे है।
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद सोने की कीमतों में तेजी सीमित रही है। इसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यूएस डॉलर इंडेक्स फिर से 100 के स्तर के करीब पहुंच रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है, क्योंकि दोनों को सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है।
मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की नीतियों का भी बाजार पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञ सुगंधा सचदेवा के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के फैसलों, जैसे वैश्विक टैरिफ नीति, भू-राजनीतिक हस्तक्षेप और नई रणनीतिक योजनाओं ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के साथ-साथ अमेरिका का क्यूबा की ओर ध्यान बढ़ना भी वैश्विक तनाव को और गहरा कर सकता है। ऐसे हालात आमतौर पर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों को समर्थन देते हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार सोने का दीर्घकालिक रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में $5,000–$5,100 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि कीमतें $5,200 से ऊपर टिकती हैं, तो अगला लक्ष्य $5,400 से $5,600 तक हो सकता है।
घरेलू बाजार में विशेषज्ञों के अनुसार:
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विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोने में गिरावट के दौरान खरीदारी करना बेहतर रणनीति हो सकती है। अगर वैश्विक तनाव जारी रहता है और डॉलर कमजोर पड़ता है, तो आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में नई तेजी देखने को मिल सकती है।