
प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- Pinterest)
New Delhi: भारतीय घरों की तिजोरियों से सोना बाहर निकलकर बाजार में पहुंचने लगा है। सोने की आसमान छूती कीमतों और भविष्य में दाम गिरने के डर से लोग अपने पुराने गहने बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। ग्राहकों के बीच यह डर बना हुआ है कि सोने की कीमतें अब अपने पीक (उच्चतम स्तर) पर पहुंच चुकी हैं और अब इनमें बड़ी गिरावट आ सकती है।
इंडिया बुलियन एंड जूलर्स असोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून की तिमाही में ग्राहकों ने करीब 50 टन पुराना सोना बेचा है, जो पिछले साल के मुकाबले 43% ज्यादा है।
30 जून 2026 को सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खरीदारी करने वालों को कुछ राहत मिली है। आज 24 कैरेट सोना करीब 1 लाख 44 हजार रुपय प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बीते दिन के मुकाबले इसकी कीमत में करीब 800 से 1,000 रुपय प्रति 10 ग्राम की कमी आई है। वहीं 22 कैरेट सोना भी 700 से 900 रुपय प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हुआ है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, लेकिन आज सोने के दाम नरम रहने से खरीदारों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है।
IBJA के नैशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के अनुसार, भारतीय ग्राहक सोने की ऊंची कीमतों का फायदा उठाकर कैश ले रहे हैं। हालांकि, सोने की कीमतें साल की शुरुआत में 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के हाई लेवल से गिरकर 1.4 लाख रुपये पर आ चुकी हैं, लेकिन लोगों में डर है कि यह और गिरकर 1.2 लाख रुपये तक पहुंच सकती हैं। यही डर उन्हें सोना बेचकर पैसा निकालने (प्रॉफिट बुकिंग) के लिए मजबूर कर रहा है।
हालिया बाजार भाव की बात करें, तो दिल्ली में सोमवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,300 रुपये बढ़कर 1,46,600 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई और यह 2,000 रुपये सस्ती होकर 2,24,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।
इंडस्ट्री जानकारों का कहना है कि ग्राहकों के नजरिए में बड़ा बदलाव आया है। लोग अब सोने को एक फाइनैंशल असेट (वित्तीय संपत्ति) की तरह देख रहे हैं, जिसे सही दाम मिलने पर तुरंत कैश कराया जा सकता है।
इस बदलते चलन से पुराना सोना खरीदने वाली कंपनियों के बिजनेस में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। मुथूट एक्जिम ने देशभर के अपने 100 से ज्यादा 'गोल्ड पॉइंट्स' पर पुराने सोने की मात्रा में 40% की बढ़त दर्ज की है। मुथूट एक्जिम के सीईओ केयूर शाह ने कहा कि लोग अब घर में रखे सोने को भरोसेमंद और पारदर्शी रास्तों से कैश में बदलने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं। इससे ग्राहकों को सही कीमत मिल रही है और बाजार में सोने की उपलब्धता भी बढ़ रही है।
भारत सोने की जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात (इंपोर्ट) पर निर्भर है। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने करीब 72.4 अरब डॉलर का सोना इंपोर्ट किया था। वहीं, साल 2025 में रीसायकल किए हुए सोने का योगदान करीब 125-150 टन रहा था। जानकारों का मानना है कि अगर पुराना सोना बेचने का यही माहौल जारी रहा, तो साल 2026 में रीसायकल होने वाले सोने की मात्रा 200-250 टन तक पहुंच सकती है। घर में रखा बेकार सोना बाजार में आने से देश की इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी।
बिक्री में भारी उछाल: अप्रैल-जून तिमाही में भारतीयों ने करीब 50 टन पुराना सोना बेचा।
प्रॉफिट बुकिंग: ऊंचे दामों का फायदा उठाकर लोग पुराने गहने बेचकर भारी कैश ले रहे हैं।
गिरावट का डर: लोगों को डर है कि सोने का भाव गिरकर 1.2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: घरेलू सोने के बाजार में आने से देश की इंपोर्ट (आयात) पर निर्भरता कम होगी।
Location : New Delhi
Published : 30 June 2026, 9:07 AM IST