केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के अपने बजट भाषण में आयकर को लेकर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से नया आईटी एक्ट लागू होगा।

बजट में 2026 से नए आईटी एक्ट का ऐलान (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 के अपने बजट भाषण में आयकर को लेकर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से नया आईटी एक्ट लागू होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब आयकर भरना पहले की अपेक्षा और भी अधिक आसान हो जायेगा।
1. छोटे टैक्स अपराध के लिए केवल जुर्माना भरना होगा।
2. सजा को कोर्ट में जुर्माने में बदला जा सकेगा।
3. 20 लाख से कम विदेश संपत्ति नहीं बताना अब जुर्म नहीं होगा।
4. रिवाइज्ड टैक्स 31 दिसंबर के बजाए 31 जुलाई तक भर सकेंगे।
5. मुकदमेबाजी को कम करने के लिये नया नियम होगा।
6. मामूली शुल्क के साथ संशोधित रिटर्न भरा जा सकेगा।
7. छह महीने क अंदर विदेशी संपत्ति की घोषणा अनिवार्य।
8. छोटे करदाताओं की समस्याएं आसान बनायी जाएंगी।
9. NRI संपत्ति बेचने पर TDS घटेगा।
10. भारत में डेटा सेंटर बनाने वालों को छूट।
11. क्लाउड सर्विस कंपनियों को 2047 तक मिलेगी छूट।
12. मकान-जमीन को बेचने पर टीडीएस घटेगा।
13. स्वास्थ्य शिक्षा पर टीसीएस 5 फीसदी से घटाकर 2 प्रतिशत किया गया।
14. विदेश में पढ़ाई करना पहले के मुकाबले होगा सस्ता।
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि नया आईटी एक्ट आम करदाताओं की परेशानियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया को सरल बनाना और अनावश्यक जटिलताओं को खत्म करना है। सरकार चाहती है कि टैक्सपेयर्स बिना डर और झंझट के समय पर रिटर्न फाइल कर सकें।
आयकर भरना होगा आसान (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
नए आयकर कानून के तहत छोटे टैक्स अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब मामूली टैक्स उल्लंघनों के मामलों में जेल की सजा नहीं होगी, बल्कि केवल जुर्माना भरकर मामला निपटाया जा सकेगा। इससे ईमानदार करदाताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
बजट में यह भी घोषणा की गई कि जिन मामलों में सजा का प्रावधान है, वहां अदालत के जरिए सजा को जुर्माने में बदला जा सकेगा। इससे लंबी कानूनी प्रक्रिया और मुकदमेबाजी में कमी आएगी। सरकार का मानना है कि इससे करदाताओं और न्याय व्यवस्था, दोनों पर बोझ कम होगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि यदि किसी करदाता की विदेश में मौजूद संपत्ति की कीमत 20 लाख रुपये से कम है और वह गलती से घोषित नहीं हो पाई है, तो इसे अब अपराध नहीं माना जाएगा। यह प्रावधान खास तौर पर उन लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, जिनकी छोटी निवेश या संपत्ति विदेश में है और जिनसे अनजाने में चूक हो जाती थी।
नए आईटी एक्ट के तहत संशोधित (रिवाइज्ड) टैक्स रिटर्न भरने की समयसीमा में भी बदलाव किया गया है। अब करदाता 31 दिसंबर के बजाय 31 जुलाई तक रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। इससे करदाताओं को गलतियों को सुधारने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
सरकार ने नए आयकर कानून में मुकदमेबाजी को कम करने के लिए अलग प्रावधान करने की बात कही है। वित्त मंत्री के अनुसार, टैक्स विवादों को जल्द सुलझाने के लिए सरल नियम बनाए जाएंगे, जिससे करदाताओं को अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
नए आईटी एक्ट में यह भी प्रावधान किया गया है कि करदाता मामूली शुल्क देकर संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। इससे टैक्सपेयर्स को छोटी गलतियों के कारण भारी पेनाल्टी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, नया आयकर कानून सरकार की उस कोशिश को दर्शाता है, जिसमें टैक्स सिस्टम को सरल बनाकर करदाताओं का भरोसा बढ़ाया जाए। यदि ये प्रावधान सही तरीके से लागू होते हैं, तो इससे टैक्स अनुपालन बढ़ेगा और विवादों में कमी आएगी।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 में घोषित नया आईटी एक्ट आयकर व्यवस्था में बड़ा सुधार माना जा रहा है, जिसका सीधा फायदा आम करदाताओं को मिलने की उम्मीद है।