महाराष्ट्र के ‘सिंघम’ का 21 साल में 25वां तबादला: IAS तुकाराम मुंढे बने FDA कमिश्नर, 2 महीने में दूसरा ट्रांसफर

महाराष्ट्र के बेहद ईमानदार और कड़क आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे का एक बार फिर तबादला कर दिया गया है। 21 साल के करियर में यह उनका 25वां ट्रांसफर है। अब उन्हें खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 May 2026, 11:07 AM IST

Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति और नौकरशाही में अपनी बेदाग छवि तथा कड़क मिजाज के लिए मशहूर वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर बड़े प्रशासनिक फेरबदल का केंद्र बने हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, 2005 बैच के इस तेज-तर्रार अधिकारी का एक बार फिर तबादला कर दिया गया है। मुंढे को इस बार खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) का कमिश्नर नियुक्त किया गया है।

गौर करने वाली बात यह है कि उनके 21 साल के प्रशासनिक करियर में यह उनका 25वां ट्रांसफर है। यही नहीं, पिछले दो महीने से भी कम समय के भीतर सरकार ने उन्हें दूसरी बार नई जिम्मेदारी सौंपी है, जिसने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

विवादों में रहे एफडीए (FDA) विभाग को सुधारने की बड़ी चुनौती

तुकाराम मुंढे को जिस खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग का कमिश्नर बनाया गया है, वह विभाग कुछ महीने पहले एक क्लर्क की घूसखोरी के मामले को लेकर मीडिया की सुर्खियों में आया था। इस विभाग के मुखिया यानी मंत्री राकांपा (NCP) के दिग्गज नेता नरहरि जिरवाल हैं। इससे पहले इसी साल अप्रैल में मुंढे का ट्रांसफर दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव के तौर पर करते हुए उन्हें मंत्री गिरीश महाजन के नेतृत्व वाले आपदा प्रबंधन, राहत और पुनर्वास विभाग में प्रधान सचिव नियुक्त किया गया था। हालांकि, राजनीतिक रस्साकशी के चलते वे कार्यभार नहीं संभाल पाए और उनके ट्रांसफर पर रोक लगा दी गई, जिसके कारण मुंढे लगभग एक महीने तक बिना किसी पोस्टिंग के 'वेटिंग' में रहे।

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वरिष्ठता के बावजूद मुंढे की इस पोस्टिंग को माना जा रहा 'झटका'

प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस बात की चर्चा है कि 2005 बैच के इतने सीनियर आईएएस अधिकारी को एफडीए कमिश्नर बनाना एक तरह का झटका है। उनसे पहले इस पद पर 2014 बैच के आईएएस अधिकारी श्रीधर दुबे तैनात थे, जिन्हें अब मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी का सीईओ (CEO) बनाया गया है। दुबे से पहले 2009 बैच के राजेश नार्वेकर इस पद पर थे।

ऐसे में कनिष्ठ (Junior) अधिकारियों वाले पद पर मुंढे की नियुक्ति को लेकर कयासबाजी तेज है। इस फेरबदल के साथ कन्हुराज बगते को मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) का एमडी बनाया गया है, जबकि आर.एस. चव्हाण को हाफकिन बायो-फार्मास्यूटिकल कॉर्पोरेशन का एमडी नियुक्त किया गया है। साथ ही संजय खंडारे को एसीएस एफडीए का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

सूखाग्रस्त बीड के किसान परिवार से 'सिंघम' बनने तक का सफर

3 जून 1975 को जन्मे तुकाराम मुंढे का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। वे महाराष्ट्र के सूखा-ग्रस्त बीड जिले के एक बेहद गरीब किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की वंजारी जाति से आते हैं। बचपन में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नंगे पैर स्कूल जाने वाले मुंढे ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से की।

इसके बाद उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, औरंगाबाद से बीए और एमए की डिग्री हासिल की और कड़ी मेहनत से यूपीएससी (UPSC) परीक्षा पास की। सोलापुर में अपनी पहली पोस्टिंग के दौरान ही उन्होंने अवैध शराब के अड्डों पर ताबड़तोड़ छापे मारकर सनसनी मचा दी थी। इसके बाद नासिक, नवी मुंबई के नगर आयुक्त और पुणे (PMPML) के सीएमडी रहते हुए उन्होंने सार्वजनिक परिवहन और चिकित्सा सेवाओं का कायाकल्प कर दिया।

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नेताओं से टकराव और 'द मैन ऑफ अ मिशन' की छवि

तुकाराम मुंढे को प्रशासनिक हलकों में 'द मैन ऑफ अ मिशन' और 'वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र' जैसे पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अडिग रुख, कड़े अनुशासन और आम जनता के लिए वित्तीय नुकसान कम करने वाली नीतियों के लिए जाने जाते हैं। वे स्टाफ के बीच जितने सख्त हैं, जनता में उतने ही लोकप्रिय हैं।

नियमों से समझौता न करने और नेताओं के अवैध दबाव को खारिज करने के कारण उनका राजनेताओं से हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहता है। रेत माफियाओं का भंडाफोड़ करने और धमकियों के बावजूद न झुकने की उनकी इसी 'सिंघम' स्टाइल के कारण नेताओं ने उन्हें कभी एक जगह टिकने नहीं दिया, जो उनके बार-बार होने वाले तबादलों की मुख्य वजह माना जाता है।

Location :  Mumbai

Published :  20 May 2026, 11:07 AM IST